हे अध्याय सिखावै हे कि तो हे जीवण रो सब रा सब रा रतण हे। जे भला हे से ए नूं अपणा मानै हे, आर जे भल न करै हे से ए नूं पनाह देवै हे। कुछ मांगणा तं न मांगणा चाहिसी, पण जे मांगै हे ते नूं मिल जाय।
Key Concepts
道
奥
宝
善人
Cite This Chapter
Laozi, Tao Te Ching, Chapter 62, "तो हे सर्व चीज़ां री आड़", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/mwr/chapters/62/
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तो हे सर्व चीज़ां री आड़ हे, भलिआं रो निरमाण हे, आर भल न करणिआं री पनाह हे। सुंदर बातण मान सकै हे, सुंदर करणूक जतन बणाई सकै हे। जणी अच्छी न करै, ते नूं कोई कइसो दूर करै हे? जे राजा राज करै आर मंत्री घोषित करै, बड्डे बड्डे रतण आर घोडे भेट करण से, ते ए तो री Sitz करणा री कमाई। पुराण समै में हां ए तो नूं कइसो कीमती मानणाते हते? क्या ए न कहणा कि जे मांग्या से मिल जाय, आर जे गुनाह हते से माफ हों जाय? एतरै से सब रा सब रा रतण हे।
गहरो विचार
इ अध्याय किण बारे में है?
हे अध्याय सिखावै हे कि तो हे जीवण रो सब रा सब रा रतण हे। जे भला हे से ए नूं अपणा मानै हे, आर जे भल न करै हे से ए नूं पनाह देवै हे। कुछ मांगणा तं न मांगणा चाहिसी, पण जे मांगै हे ते नूं मिल जाय।
इ म्हारे सूं केड़ो संबंधित है?
मेरे जीवण में हां, जे बण कमाणो बणै हे, ते ज्यादा कमाई करण से नहीं, ते ए सिखावण सूं हे कि तो हे सब री आड़ हे। मेरे सब करणूकां में हां म्हारा आर ए तो रा संबंध बणी राखणा चाहिसी।
आज म्हैं के करणो चाहीजे?
आज सांझे थोड़ा समै निकाली के तो री बातां में बैठणी। बाहर की चिंता न करी के, म्हारे भीतर री तो नूं ढूंढणी। सब कुछ बाहर सूं नहीं, म्हारे भीतर मिलै हे।
Tao has of all things the most honoured place. No treasures give good men so rich a grace; Bad men it guards, and doth their ill efface. Why was it that the ancients prized this Tao so much? Was it not because it could be got by seeking for it, and the guilty could escape (from the stains of their guilt) by it?
AI Modern
तो हे सर्व चीज़ां री आड़ हे, भलिआं रो निरमाण हे, आर भल न करणिआं री पनाह हे। सुंदर बातण मान सकै हे, सुंदर करणूक जतन बणाई सकै हे। जणी अच्छी न करै, ते नूं कोई कइसो दूर करै हे? जे राजा राज करै आर मंत्री घोषित करै, बड्डे बड्डे रतण आर घोडे भेट करण से, ते ए तो री Sitz करणा री कमाई। पुराण समै में हां ए तो नूं कइसो कीमती मानणाते हते? क्या ए न कहणा कि जे मांग्या से मिल जाय, आर जे गुनाह हते से माफ हों जाय? एतरै से सब रा सब रा रतण हे।
म्हारो विचार
What does this chapter inspire in you? How will you apply it?