यह अध्याय प्राकृतिक तरीके से बात करने और कार्य करने की शक्ति पर जोर देता है। प्रकृति की घटनाएँ अल्पकालिक होती हैं, इसलिए हमें सादगी और सच्चाई में रहना चाहिए। मार्ग, गुण और हानि के साथ तादात्म्य ही सच्चा सामंजस्य लाता है।
Key Concepts
स्वाभाविकता
希言
道者同于道
Cite This Chapter
Laozi, Tao Te Ching, Chapter 23, "मौन प्रकृति की बात", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/hi/chapters/23/
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मौन प्रकृति का मार्ग है। तूफान पूरी सुबह नहीं चलता, मूसलाधार बारिश पूरे दिन नहीं होती। यह कौन करता है? धरती और आकाश। धरती और आकाश भी स्थायी नहीं रह सकते, तो मनुष्य की बात ही क्या? इसलिए जो मार्ग का अनुसरण करता है, वह मार्ग के साथ एक हो जाता है। जो गुण का अनुसरण करता है, वह गुण के साथ एक हो जाता है। जो हानि का अनुसरण करता है, वह हानि के साथ एक हो जाता है। जो मार्ग के साथ एक है, मार्ग भी उसे प्राप्त करने में प्रसन्न होता है। जो गुण के साथ एक है, गुण भी उसे प्राप्त करने में प्रसन्न होता है। जो हानि के साथ एक है, हानि भी उसे प्राप्त करने में प्रसन्न होती है। जहाँ विश्वास अपर्याप्त है, वहाँ अविश्वास उत्पन्न होता है।
गहन चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
यह अध्याय प्राकृतिक तरीके से बात करने और कार्य करने की शक्ति पर जोर देता है। प्रकृति की घटनाएँ अल्पकालिक होती हैं, इसलिए हमें सादगी और सच्चाई में रहना चाहिए। मार्ग, गुण और हानि के साथ तादात्म्य ही सच्चा सामंजस्य लाता है।
इसका मुझसे क्या संबंध है?
मेरे जीवन में, मैं अक्सर चीजों को जबरदस्ती करने या लंबे समय तक तनाव में रहने की कोशिश करता हूँ। यह अध्याय मुझे याद दिलाता है कि शांति और मौन में ही सच्ची शक्ति है। जब मैं प्रकृति के प्रवाह के साथ चलता हूँ, तो मैं अधिक संतुलित और शांत महसूस करता हूँ।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज, मैं कुछ समय मौन में बिताऊँगा—बिना बोले, बिना काम किए। प्रकृति की आवाज़ों को सुनूँगा और महसूस करूँगा कि कैसे यह मुझे अपने भीतर की शांति से जोड़ता है।
Abstaining from speech marks him who is obeying the spontaneity of his nature. A violent wind does not last for a whole morning; a sudden rain does not last for the whole day. If Heaven and Earth cannot make such (spasmodic) actings last long, how much less can man!
AI Modern
मौन प्रकृति का मार्ग है। तूफान पूरी सुबह नहीं चलता, मूसलाधार बारिश पूरे दिन नहीं होती। यह कौन करता है? धरती और आकाश। धरती और आकाश भी स्थायी नहीं रह सकते, तो मनुष्य की बात ही क्या? इसलिए जो मार्ग का अनुसरण करता है, वह मार्ग के साथ एक हो जाता है। जो गुण का अनुसरण करता है, वह गुण के साथ एक हो जाता है। जो हानि का अनुसरण करता है, वह हानि के साथ एक हो जाता है। जो मार्ग के साथ एक है, मार्ग भी उसे प्राप्त करने में प्रसन्न होता है। जो गुण के साथ एक है, गुण भी उसे प्राप्त करने में प्रसन्न होता है। जो हानि के साथ एक है, हानि भी उसे प्राप्त करने में प्रसन्न होती है। जहाँ विश्वास अपर्याप्त है, वहाँ अविश्वास उत्पन्न होता है।
मेरा चिंतन
यह अध्याय आपको क्या प्रेरणा देता है? आप इसे कैसे लागू करेंगे?
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