अध्याय 42
एक से अनेक
मूल
道生一,一生二,二生三,三生万物。万物负阴而抱阳,冲气以为和。
人之所恶,唯孤、寡、不谷,而王公以为称。故物或损之而益,或益之而损。
人之所教,我亦教之。强梁者不得其死,吾将以为教父。
人之所恶,唯孤、寡、不谷,而王公以为称。故物或损之而益,或益之而损。
人之所教,我亦教之。强梁者不得其死,吾将以为教父。
अनुवाद
ताओ से एक उत्पन्न होता है; एक से दो उत्पन्न होते हैं; दो से तीन उत्पन्न होते हैं; तीन से सभी वस्तुएँ उत्पन्न होती हैं। सभी वस्तुएँ यिन को पीठ पर और यांग को गोद में लिए होती हैं, और शून्य की ऊर्जा से सामंजस्य बनाती हैं। मनुष्य जिन चीज़ों से घृणा करते हैं, वे हैं अकेलापन, अनाथता, और अयोग्यता—फिर भी राजा और शासक इन्हीं शब्दों से अपने आपको पुकारते हैं। इसलिए, वस्तुएँ कभी घटने से बढ़ती हैं, और कभी बढ़ने से घटती हैं। जो दूसरे सिखाते हैं, मैं भी वही सिखाता हूँ: हिंसक और दृढ़ व्यक्ति अपनी मृत्यु को प्राप्त नहीं करता। यह मेरे शिक्षण का मूल सिद्धांत होगा।
गहन चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
यह अध्याय सृष्टि की प्रक्रिया को समझाता है: ताओ से एक, एक से दो (यिन-यांग), दो से तीन, और तीन से सब कुछ उत्पन्न होता है। यह विरोधाभासों के सामंजस्य और नम्रता के महत्व पर जोर देता है।
इसका मुझसे क्या संबंध है?
मेरे जीवन में, यह मुझे याद दिलाता है कि मैं अकेला नहीं हूँ; मैं एक बड़ी प्रक्रिया का हिस्सा हूँ। विरोधी शक्तियाँ (जैसे सुख-दुख) मुझे संतुलन सिखाती हैं। नम्रता अपनाकर, मैं घटने-बढ़ने के चक्र को समझ सकता हूँ और हिंसा से बच सकता हूँ।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज, जब मैं किसी विरोधाभास या संघर्ष का सामना करूँ, तो एक पल रुककर सोचूँ कि कैसे दोनों पक्ष एक-दूसरे को पूरा कर सकते हैं। नम्रता से बोलें और कार्य करें।
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