यह अध्याय बताता है कि विपरीतताओं के माध्यम से सामंजस्य कैसे प्राप्त होता है। नम्रता, झुकना और संयम ही सच्ची शक्ति और पूर्णता के मार्ग हैं। संत एकता को अपनाकर अहंकार और प्रतिस्पर्धा से मुक्त रहता है, जिससे वह प्रकाशित और अजेय होता है।
Key Concepts
अप्रतिस्पर्धा
谦下
曲全
抱一
Cite This Chapter
Laozi, Tao Te Ching, Chapter 22, "टेढ़ा होकर सीधा होना", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/hi/chapters/22/
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टेढ़ा होकर पूर्णता आती है, झुककर सीधापन आता है। खाली होकर भरा जाता है, पुराना होकर नया मिलता है। थोड़ा पाकर लाभ होता है, बहुत पाकर भ्रम होता है। इसलिए संत एकता को धारण करके संसार का आदर्श बनता है। वह खुद को नहीं दिखाता, इसलिए वह प्रकाशित होता है। वह खुद को सही नहीं ठहराता, इसलिए वह प्रसिद्ध होता है। वह खुद की प्रशंसा नहीं करता, इसलिए उसे यश मिलता है। वह खुद का अभिमान नहीं करता, इसलिए वह दीर्घकाल तक रहता है। केवल इसलिए कि वह संघर्ष नहीं करता, संसार में कोई उससे संघर्ष नहीं कर सकता। प्राचीन कथन 'टेढ़ा होकर पूर्णता' व्यर्थ शब्द नहीं है। सचमुच, वह पूर्णता को प्राप्त करता है और उसमें लौट जाता है।
गहन चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
यह अध्याय बताता है कि विपरीतताओं के माध्यम से सामंजस्य कैसे प्राप्त होता है। नम्रता, झुकना और संयम ही सच्ची शक्ति और पूर्णता के मार्ग हैं। संत एकता को अपनाकर अहंकार और प्रतिस्पर्धा से मुक्त रहता है, जिससे वह प्रकाशित और अजेय होता है।
इसका मुझसे क्या संबंध है?
मेरे जीवन में, अक्सर मैं सीधा और तुरंत परिणाम चाहता हूँ। यह अध्याय मुझे सिखाता है कि झुकना, त्यागना और कम चाहना वास्तव में अधिक पाने का रास्ता हो सकता है। जब मैं अपने अहंकार को छोड़ता हूँ, तो मैं अधिक स्पष्ट और शांतिपूर्ण हो जाता हूँ।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज, एक ऐसी स्थिति में जहाँ मैं अपनी बात पर अड़ना चाहता हूँ, मैं जानबूझकर नरमी और लचीलापन दिखाऊँगा। अपने विचार को थोपने के बजाय दूसरे की बात सुनूँगा और देखूँगा कि कैसे यह मुझे नई संभावनाएँ देता है।
The partial becomes complete; the crooked, straight; the empty, full; the worn out, new. He whose (desires) are few gets them; he whose (desires) are many goes astray. Therefore the sage holds in his embrace the one thing (of humility), and manifests it to all the world. He is free from self-display, and therefore he shines.
AI Modern
टेढ़ा होकर पूर्णता आती है, झुककर सीधापन आता है। खाली होकर भरा जाता है, पुराना होकर नया मिलता है। थोड़ा पाकर लाभ होता है, बहुत पाकर भ्रम होता है। इसलिए संत एकता को धारण करके संसार का आदर्श बनता है। वह खुद को नहीं दिखाता, इसलिए वह प्रकाशित होता है। वह खुद को सही नहीं ठहराता, इसलिए वह प्रसिद्ध होता है। वह खुद की प्रशंसा नहीं करता, इसलिए उसे यश मिलता है। वह खुद का अभिमान नहीं करता, इसलिए वह दीर्घकाल तक रहता है। केवल इसलिए कि वह संघर्ष नहीं करता, संसार में कोई उससे संघर्ष नहीं कर सकता। प्राचीन कथन 'टेढ़ा होकर पूर्णता' व्यर्थ शब्द नहीं है। सचमुच, वह पूर्णता को प्राप्त करता है और उसमें लौट जाता है।
मेरा चिंतन
यह अध्याय आपको क्या प्रेरणा देता है? आप इसे कैसे लागू करेंगे?
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