जो जानता है, वह नहीं बोलता; जो बोलता है, वह नहीं जानता। अपने छिद्रों को बंद करो, अपने द्वारों को बंद करो, अपनी तीक्ष्णता को कुंद करो, अपने उलझनों को सुलझाओ, अपनी चमक को मंद करो, अपने आप को धूल में मिलाओ—इसे गहन एकता कहते हैं। इसलिए उसके साथ न तो निकटता प्राप्त की जा सकती है, न दूरी; न लाभ, न हानि; न सम्मान, न अपमान। इसलिए वह संसार का सबसे मूल्यवान है।
गहन चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
यह अध्याय मौन और गहन एकता का महत्व बताता है—जहाँ ज्ञानी व्यक्ति बाहरी भेदों से परे होकर संसार में सबसे मूल्यवान बनता है।
इसका मुझसे क्या संबंध है?
यह मुझे सिखाता है कि सच्चा ज्ञान शब्दों में नहीं, बल्कि मौन और सादगी में है—मुझे अपने विचारों और इच्छाओं को शांत करने की आवश्यकता है।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज, एक घंटे के लिए मौन रहें—बिना बोले, बिना फोन देखे—और देखें कि यह आपके मन को कैसे शांत करता है।
He who knows (the Tao) does not (care to) speak (about it); he who is (ever ready to) speak about it does not know it. This is called 'the Mysterious Agreement.' (Such an one) cannot be treated familiarly or distantly; he is beyond all consideration of profit or injury; of nobility or meanness: he is the noblest man under heaven.
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जो जानता है, वह नहीं बोलता; जो बोलता है, वह नहीं जानता। अपने छिद्रों को बंद करो, अपने द्वारों को बंद करो, अपनी तीक्ष्णता को कुंद करो, अपने उलझनों को सुलझाओ, अपनी चमक को मंद करो, अपने आप को धूल में मिलाओ—इसे गहन एकता कहते हैं। इसलिए उसके साथ न तो निकटता प्राप्त की जा सकती है, न दूरी; न लाभ, न हानि; न सम्मान, न अपमान। इसलिए वह संसार का सबसे मूल्यवान है।
मेरा चिंतन
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