एह चैप्टर में कहल गइल बा कि जे अच्छा-पक्का कुछ बनावेला ओकरा कुछ भी हिला ना पावेला। ई बनावट शुरू में अपने से होला आ फेर धीरे-धीरे फइलत जाला - घर, गाँव, राज्य, संसार। जइसन अपने में बनाव हवा वैसन सब जगह देखल जा सकेला।
Key Concepts
修身
观
德
Cite This Chapter
Laozi, Tao Te Ching, Chapter 54, "अच्छा बनावे वाला उखड़े ना", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/bho/chapters/54/
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जे मनुष्य अच्छा-मजबूत बनावेला ओकरा कुछ भी उखाड़ ना पावेला, जे जोबर पकड़ेला ओकरा कोई छोड़ा ना पावेला, एहिसे के बच्चा-बाँकी आदमी जब तक रहीं पूजा-पाठ करत रहीं। जे अपने में ई बनावेला ओकर इज्जत-आबरू ठीक होला; जे घर में बनावेला ओकर दौलत बढ़ेला; जे गाँव में बनावेला ओकर इज्जत बड़ी होला; जे राज्य में बनावेला ओकर खातिर सब कुछ उपजाऊ होला; जे सारे संसार में बनावेला ओकर इज्जत सब जगह फइल जाला। एहिसे से अपने से अपने के देखल जाला, घर से घर के देखल जाला, गाँव से गाँव के देखल जाला, राज्य से राज्य के देखल जाला, संसार से संसार के देखल जाला। हम संसार के बारे में कइसे जानीं? एहही से!
गहन चिंतन
एहि अध्याय में का बात होला?
एह चैप्टर में कहल गइल बा कि जे अच्छा-पक्का कुछ बनावेला ओकरा कुछ भी हिला ना पावेला। ई बनावट शुरू में अपने से होला आ फेर धीरे-धीरे फइलत जाला - घर, गाँव, राज्य, संसार। जइसन अपने में बनाव हवा वैसन सब जगह देखल जा सकेला।
एहि के मोहल्ला से का संबंध?
हम देखत बानीं कि दुनिया में सब कुछ बदलत बा - लोग, जगह, हालात। बाकी कुछ चीज एहनो बा जे हमेशा रही - जइसे पहिले के लोग के बात, उनकर सीख। ई अमर बनाव हम भी अपने में बसा सकत बानीं।
आज का करब?
आज अपने में से एक अच्छा गुण के चुनीं जेकरा के आगे बढ़ावे के चाहीं - इमानदारी, दयालुता, या धैर्य - आ कल से ओहके अपने जीवन में लागू करे के कोशिश करीं।
What (Tao's) skilful planter plants Can never be uptorn; What his skilful arms enfold, From him can ne'er be borne. Sons shall bring in lengthening line, Sacrifices to his shrine. Tao when nursed within one's self, His vigour will make true; And where the family it rules What riches will accrue!
एआई आधुनिक
जे मनुष्य अच्छा-मजबूत बनावेला ओकरा कुछ भी उखाड़ ना पावेला, जे जोबर पकड़ेला ओकरा कोई छोड़ा ना पावेला, एहिसे के बच्चा-बाँकी आदमी जब तक रहीं पूजा-पाठ करत रहीं। जे अपने में ई बनावेला ओकर इज्जत-आबरू ठीक होला; जे घर में बनावेला ओकर दौलत बढ़ेला; जे गाँव में बनावेला ओकर इज्जत बड़ी होला; जे राज्य में बनावेला ओकर खातिर सब कुछ उपजाऊ होला; जे सारे संसार में बनावेला ओकर इज्जत सब जगह फइल जाला। एहिसे से अपने से अपने के देखल जाला, घर से घर के देखल जाला, गाँव से गाँव के देखल जाला, राज्य से राज्य के देखल जाला, संसार से संसार के देखल जाला। हम संसार के बारे में कइसे जानीं? एहही से!
मोहना विचार
एहि अध्याय में रउआ के का प्रेरित करेला? रउआ एकरा केसे लागू करब?