ई अध्याय बतावेला कि जेकरा में गुण के पूर्णता होई ऊ नवजात बच्चा जइसन हो जाला। प्रकृति स्वतः ऊकरा के रक्षा करेला। जब प्राण और मन के बीच में परम शांति होला तऽ सच्चा बल मिलेला।
Key Concepts
赤子
含德
和
精
Cite This Chapter
Laozi, Tao Te Ching, Chapter 55, "गुण से भरल परभू", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/bho/chapters/55/
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जेकरा में गुण के भारीपन होई, ओकरा के नवजात बालक जइसन मानी। विषैला कीड़ा नऽनूँ काटे, बंदर पशु नऽनूँ मारे, चंगुली पंछी नऽनूँ लपेटे। हड्डी नरम होला, नाड़ी मुलायम होला बाकिर मुट्ठी अउरी कठोर होला। नर-मादा के मिलन के बात नऽनूँ जाने बाकिर लिग हिल जाला - ई प्राण के सात्विकता ह। पूरा दिन चिचियावे बाकिर गला नऽनूँ बैठे - ई मिलाप के शीतलता ह। मिलाप के जानल योग्यता ह, योग्यता के जानल सूझ ह। जिनगी के बढ़ावल अशुभ ह, मन से प्राण के चलावल ताकत ह। चीज़ जब ताकतवर हो जाला तऽ पुरान हो जाला, एकरा के अधर्म कहल जाला, अधर्म जल्दी खतम हो जाला।
गहन चिंतन
एहि अध्याय में का बात होला?
ई अध्याय बतावेला कि जेकरा में गुण के पूर्णता होई ऊ नवजात बच्चा जइसन हो जाला। प्रकृति स्वतः ऊकरा के रक्षा करेला। जब प्राण और मन के बीच में परम शांति होला तऽ सच्चा बल मिलेला।
एहि के मोहल्ला से का संबंध?
हमरा में जब आंतरिक शांति होला तऽ बाहर के दुनिया के भय कम हो जाला। हम बच्चा जइसन सरल होने के कोशिश कर सकेनी जहाँ न तनाव हो न अहंकार।
आज का करब?
आज सुबह कुछ पल बैठ के अपना साँस के देखी - ओकरा के रोकले बिना, बस देखले। मन के गड़गड़ाहट के सुनले बिना, बस सुनले। एहिमे से भीतर के कोमलता के अनुभव होई।
He who has in himself abundantly the attributes (of the Tao) is like an infant. Poisonous insects will not sting him; fierce beasts will not seize him; birds of prey will not strike him. (The infant's) bones are weak and its sinews soft, but yet its grasp is firm. When things have become strong, they (then) become old, which may be said to be contrary to the Tao. Whatever is contrary to the Tao soon ends.
एआई आधुनिक
जेकरा में गुण के भारीपन होई, ओकरा के नवजात बालक जइसन मानी। विषैला कीड़ा नऽनूँ काटे, बंदर पशु नऽनूँ मारे, चंगुली पंछी नऽनूँ लपेटे। हड्डी नरम होला, नाड़ी मुलायम होला बाकिर मुट्ठी अउरी कठोर होला। नर-मादा के मिलन के बात नऽनूँ जाने बाकिर लिग हिल जाला - ई प्राण के सात्विकता ह। पूरा दिन चिचियावे बाकिर गला नऽनूँ बैठे - ई मिलाप के शीतलता ह। मिलाप के जानल योग्यता ह, योग्यता के जानल सूझ ह। जिनगी के बढ़ावल अशुभ ह, मन से प्राण के चलावल ताकत ह। चीज़ जब ताकतवर हो जाला तऽ पुरान हो जाला, एकरा के अधर्म कहल जाला, अधर्म जल्दी खतम हो जाला।
मोहना विचार
एहि अध्याय में रउआ के का प्रेरित करेला? रउआ एकरा केसे लागू करब?