अध्याय 47

दरवाजा ना खोले के बिद्या

不出户,知天下;不窥牖,见天道。其出弥远,其知弥少。
是以圣人不行而知,不见而名,不为而成。
बिनु दरवाजा खोले, संसार के ज्ञान हो जाला; खिड़की में ना झाँकें, स्वर्ग के मार्ग देखाई पड़ला। जे लोग बाहर भागत रहेलें, ओकरा के ज्ञान कम मिलेला। एही से संत ज्ञानी लोग बिनु भागे-दौड़े जानत रहेला, बिनु देखे नाम कमावत रहेला, आ बिनु करे सब कुछ पूरा कर लेत रहेला।

गहन चिंतन

एहि अध्याय में का बात होला?

ई अध्याय कहेला कि असली ज्ञान बाहर जाए के जरूरत ना बा। जे आदमी बाहर-भीतर सब जगह घुमत फिरेला, ओकरा के अंदर के बात कम पता चलेला। संत आत्मा के गहिराई में झाँकत रहेला, बाहर के दौड़-धूप में ना पड़त रहेला।

एहि के मोहल्ला से का संबंध?

हम कई बेर बाहर के भागमभाग में अपना भीतर के शांति गँवा दिआी। बाहर के सुख खोजत-खोजत अंदर के खुशी भूल गईला। अब समझ में आवत बा कि बाहर के चीज हमरा के शांति ना दे सकीला, ई त अंदर से आवेला।

आज का करब?

आज कवनो एक दिन बिनु मोबाइल, बिनु बाहर जाए के, अपना में बइठ के ध्यान लगाई। अपना आत्मा के सुने के कोशिश करी आ देखी कि भीतर से कवना बात आवेला। एहि से असली ज्ञान मिली।

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मोहना विचार

एहि अध्याय में रउआ के का प्रेरित करेला? रउआ एकरा केसे लागू करब?

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