ई अध्याय बतावेला कि जीवन के शुरुआत कोमल अउर मुलायम होला, मृत्यु में बदल जाला सख्त-कठोर। जइसे-जइसे चीज जुगुवाँ होखेला, ओहिके कोमलता कम हो जाला। ई नियम संसार के सभी चीजा पर लागू होला - मनुष्य होई या फूल-पाती। जउन मनुष्य कोमल रहेला, ओकरा के जीवन मिलेला; जउन सख्त रहेला, ओकरा के मृत्यु मिलेला। एहिके कारण ताकतवर सेना या लकड़ी जवन सख्त हो जाला, ओकरा के नाश हो जाला। कोमलता में ही असली शक्ति बा।
Key Concepts
柔弱
坚强
生
死
Cite This Chapter
Laozi, Tao Te Ching, Chapter 76, "जियन के कोमल अवस्था, मरन के कठोर रूप", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/bho/chapters/76/
Classical Chinese, translation, and AI reflection are shown separately; cite this chapter URL for references.
मनुष्य जब जीये रहे त सुंदर अउर कोमल रहे, जब मरे जाए त सख्त अउर अडिग रहे। सभ्यता के जीवन-मृत्यु के द्वंद्व को दर्शाते हुए, यह अध्याय जीवन की कोमलता और मृत्यु की कठोरता के बीच के गहरे अंतर को उजागर करता है।\n\nनन्हा जीव जब पैदा होला त नरम-मुलायम होला, बूढ़ होखे पर कड़ा-कठोर हो जाला।\n\nगुल-पाती, बिरगा-झाड़ी जब जियत रहे त ताजा अउर मुलायम रहे, मर जाए पर सूखा-मुरझायल हो जाला।\n\nएहिसे कारण सख्त-कठोर वालन के रास्ता मौत के रास्ता बा, कोमल-मुलायम वालन के रास्ता जियन के रास्ता बा।\n\nएहिसे से जउन सेना अपना ताकत पे भरोसा करेले, ओकरा के पराजय मिलेला; जउन लकड़ी सख्त हो जाला, ओकरा के तोड़फोड़ कइल जाला।\n\nताकतवर कहाँ रहेला नीचे, कोमल-कमजोर कहाँ रहेला ऊपर।
गहन चिंतन
एहि अध्याय में का बात होला?
ई अध्याय बतावेला कि जीवन के शुरुआत कोमल अउर मुलायम होला, मृत्यु में बदल जाला सख्त-कठोर। जइसे-जइसे चीज जुगुवाँ होखेला, ओहिके कोमलता कम हो जाला। ई नियम संसार के सभी चीजा पर लागू होला - मनुष्य होई या फूल-पाती। जउन मनुष्य कोमल रहेला, ओकरा के जीवन मिलेला; जउन सख्त रहेला, ओकरा के मृत्यु मिलेला। एहिके कारण ताकतवर सेना या लकड़ी जवन सख्त हो जाला, ओकरा के नाश हो जाला। कोमलता में ही असली शक्ति बा।
एहि के मोहल्ला से का संबंध?
हम सब के जीवन में भी ई बात देखला मिलेला कि जब हम कोमल-मुलायम बानी रही त सब काम आसानी से बन गईी; जब सख्त हो गईी तब काम बिगड़ गईी। हम अक्सर अपना लचीलापन खो देवेला जब चिंता या डर में पड़ जातानी। लेकिन ई अध्याय हमके बतावेला कि नरम रहना सबसे बड़का ताकत हवे। जब हम दूसरन के साथ कठोर व्यवहार करेला, तब हम अपना जीयन के रास्ता में ही बाधा डालेला।
आज का करब?
आज हम कोशिश करब कि अपना जीवन में कवनो से भी सख्ती न करब। जउन व्यक्ति हमरा से कवनो बात में असहमत होई या हमरा के चिढ़ाई, ओकरा के गुस्सा में जवाब न देवब। बिस्तार से साँस लेवब, शांत रहब, अउर कोमल जबान से जवाब देवब।
Man at his birth is supple and weak; at his death, firm and strong. (So it is with) all things. Trees and plants, in their early growth, are soft and brittle; at their death, dry and withered. Thus it is that firmness and strength are the concomitants of death; softness and weakness, the concomitants of life.
एआई आधुनिक
मनुष्य जब जीये रहे त सुंदर अउर कोमल रहे, जब मरे जाए त सख्त अउर अडिग रहे। सभ्यता के जीवन-मृत्यु के द्वंद्व को दर्शाते हुए, यह अध्याय जीवन की कोमलता और मृत्यु की कठोरता के बीच के गहरे अंतर को उजागर करता है।\n\nनन्हा जीव जब पैदा होला त नरम-मुलायम होला, बूढ़ होखे पर कड़ा-कठोर हो जाला।\n\nगुल-पाती, बिरगा-झाड़ी जब जियत रहे त ताजा अउर मुलायम रहे, मर जाए पर सूखा-मुरझायल हो जाला।\n\nएहिसे कारण सख्त-कठोर वालन के रास्ता मौत के रास्ता बा, कोमल-मुलायम वालन के रास्ता जियन के रास्ता बा।\n\nएहिसे से जउन सेना अपना ताकत पे भरोसा करेले, ओकरा के पराजय मिलेला; जउन लकड़ी सख्त हो जाला, ओकरा के तोड़फोड़ कइल जाला।\n\nताकतवर कहाँ रहेला नीचे, कोमल-कमजोर कहाँ रहेला ऊपर।
मोहना विचार
एहि अध्याय में रउआ के का प्रेरित करेला? रउआ एकरा केसे लागू करब?