अध्याय 3
बड़मा बड़ ना होवे के बात
Quick Answer
ई अध्याय कहेला कि बड़मा के सम्मान ना करे से झगड़ा ना होई। दुर्लभ चीज कीमती ना बनावे से चोरी ना होई। संत जन के शासन मन के शांत करे, पेट भरके, इच्छा कम के, हड्डी मजबूत के करेला।
Key Concepts
- 无为
- 治国
- 欲望
- 简朴
Cite This Chapter
Laozi, Tao Te Ching, Chapter 3, "बड़मा बड़ ना होवे के बात", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/bho/chapters/3/
Classical Chinese, translation, and AI reflection are shown separately; cite this chapter URL for references.
मूल
是以圣人之治,虚其心,实其腹,弱其志,强其骨。常使民无知无欲,使夫智者不敢为也。为无为,则无不治。
अनुवाद
एहसे संत के शासन अइसन होला - मन के खाली कर देवेला, पेट के भर देवेला, इच्छा के कम कर देवेला, हड्डी के मजबूत कर देवेला। आम लोगन के अनजान अउर बिनु चाह के रखी, त कोई चतुर भी कुछ ना कर सकेला। जे बिनु करम के करेला, ओकरा के कोई हरा ना सकेला।
गहन चिंतन
एहि अध्याय में का बात होला?
ई अध्याय कहेला कि बड़मा के सम्मान ना करे से झगड़ा ना होई। दुर्लभ चीज कीमती ना बनावे से चोरी ना होई। संत जन के शासन मन के शांत करे, पेट भरके, इच्छा कम के, हड्डी मजबूत के करेला।
एहि के मोहल्ला से का संबंध?
जब हम जरूरत से बेसी कुछ चाहे बानी, त मन बिगड़ जाला। जब सादा जीव बितावी, त शांति मिलेला। हमरा ले ई समझना जरूरी बा कि भोग ना, संतोष बड़ बा।
आज का करब?
आज अपना जरूरत अउर इच्छा के लिस्ट बनावी। ओकरा में से सच्ची जरूरत अउर बस मन के चाह के बीच के फर्क समझी। फिर इच्छा के थोड़ा कम करे के कोशिश करी - जे ना चाहीं ओकरा के टाल देवी।
सम्बंधित अध्याय
मोहना विचार
एहि अध्याय में रउआ के का प्रेरित करेला? रउआ एकरा केसे लागू करब?