ई अध्याय कहेला कि बिना मेहनत के काम करे के चाहीं, यानी अपने मन के शांत रख के काम करे के चाहीं। छोट-छोट काम से बड़का काम बनावे के चाहीं। जे सबके आसान मानेला, ओकरा के मुश्किल भेंटेला।
Key Concepts
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难易
Cite This Chapter
Laozi, Tao Te Ching, Chapter 63, "Khaali Haath Se Kaam Karo", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/bho/chapters/63/
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नइख करत कुछ त पर काम करीं, नइख होत कुछ त पर काम करीं, स्वाद नइख होत त पर खाईं। बड़का के छोट मानीं, बहुत के थोड़ा मानीं, बुराई के भलाई से मिटाईं। मुश्किल के आसान में पकड़ीं, बड़का काम के छोट-छोट भाग में बांटीं। दुनिया के मुश्किल काम पहिले आसान से शुरू होला, बड़का काम पहिले छोट-छोट काम से शुरू होला। एहि कारण सच्चा बुद्धिमान जीव कबो बड़ा नइखे मनत, तऽ बड़का बन जाला। जे जल्दी-जल्दी वादा करेला, ओकरा के भरोसा कम होला। जे सबके आसान मानेला, ओकरा के बहुत मुश्किल भेंटेला। एहि कारण सच्चा बुद्धिमान जीव हर काम के मुश्किल मानेला, एहि कारण ओकरा के कोई मुश्किल नइखे भेंटत।
गहन चिंतन
एहि अध्याय में का बात होला?
ई अध्याय कहेला कि बिना मेहनत के काम करे के चाहीं, यानी अपने मन के शांत रख के काम करे के चाहीं। छोट-छोट काम से बड़का काम बनावे के चाहीं। जे सबके आसान मानेला, ओकरा के मुश्किल भेंटेला।
एहि के मोहल्ला से का संबंध?
हमरा जीवन में जब हम कवनो बड़का काम के देखत ही डर गईं, तब ओकरा के छोट-छोट हिस्सा में बांट कय धीरे-धीरे करे के कोशिश करलीं। एहि से काम आसान भइल आ मन में शांति रहल।
आज का करब?
आज कवनो एक काम के लीं जेकरा के बहुत दिन से टालत आइल बानीं। ओकरा के तीन छोट-छोट हिस्सा में बांटीं आ आज जे पहिला हिस्सा हवे ओकरा के पूरा करीं।
(It is the way of the Tao) to act without (thinking of) acting; to conduct affairs without (feeling the) trouble of them; to taste without discerning any flavour; to consider what is small as great, and a few as many; and to recompense injury with kindness. Therefore the sage sees difficulty even in what seems easy, and so never has any difficulties.
एआई आधुनिक
नइख करत कुछ त पर काम करीं, नइख होत कुछ त पर काम करीं, स्वाद नइख होत त पर खाईं। बड़का के छोट मानीं, बहुत के थोड़ा मानीं, बुराई के भलाई से मिटाईं। मुश्किल के आसान में पकड़ीं, बड़का काम के छोट-छोट भाग में बांटीं। दुनिया के मुश्किल काम पहिले आसान से शुरू होला, बड़का काम पहिले छोट-छोट काम से शुरू होला। एहि कारण सच्चा बुद्धिमान जीव कबो बड़ा नइखे मनत, तऽ बड़का बन जाला। जे जल्दी-जल्दी वादा करेला, ओकरा के भरोसा कम होला। जे सबके आसान मानेला, ओकरा के बहुत मुश्किल भेंटेला। एहि कारण सच्चा बुद्धिमान जीव हर काम के मुश्किल मानेला, एहि कारण ओकरा के कोई मुश्किल नइखे भेंटत।
मोहना विचार
एहि अध्याय में रउआ के का प्रेरित करेला? रउआ एकरा केसे लागू करब?