अध्याय 35

महारूप के पकड़

Quick Answer

ई अध्याय कहइत बा कि जे महान तत्व के पकड़ लिहल जाय, संसार के सबे मनुष्य ओकर द्वार पर आवत बा। ओकरा ले जाइत बिनु कवनो हानि के, शांति मिलैत बा अउर सबरह सुख मिलैत बा। दुनिया में जे चीज लोग के रोकइत बा - गावन बजावन, खाइ पिइ - ई तो अस्थायी बा। बाकी जे मारग कहल जाला, ओकरा में न कवनो स्वाद बा, न दिखाई दैत बा, न सुनाई दैत बा, पर इस्तेमाल में ओकर कोई अंत नाहीं।

Key Concepts

  • 大象
  • 用之不既

Cite This Chapter

Laozi, Tao Te Ching, Chapter 35, "महारूप के पकड़", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/awa/chapters/35/

Classical Chinese, translation, and AI reflection are shown separately; cite this chapter URL for references.

执大象,天下往。往而不害,安平太。
乐与饵,过客止。道之出口,淡乎其无味,视之不足见,听之不足闻,用之不足既。
जे महा स्वरूप के पकड़ै, ओकरा ले सब संसार जाइत। जाइत बिनु हानि के, होइ जाइत शांति मंगल जे सब।
गावन बजावन खाइ पिइ, जेवना से मारगी लोग ठहर जाइत। मारग बात में कहे पर, सबस नीरस लागै, नजरि से नीरस, कान से नीरस, पर इस्तेमाल में अंत नाहीं।

गहरा चिंतन

यह अध्याय किस बारे में है?

ई अध्याय कहइत बा कि जे महान तत्व के पकड़ लिहल जाय, संसार के सबे मनुष्य ओकर द्वार पर आवत बा। ओकरा ले जाइत बिनु कवनो हानि के, शांति मिलैत बा अउर सबरह सुख मिलैत बा। दुनिया में जे चीज लोग के रोकइत बा - गावन बजावन, खाइ पिइ - ई तो अस्थायी बा। बाकी जे मारग कहल जाला, ओकरा में न कवनो स्वाद बा, न दिखाई दैत बा, न सुनाई दैत बा, पर इस्तेमाल में ओकर कोई अंत नाहीं।

यह मुझसे कैसे संबंधित है?

हम सब भी संसार के चमक-चकाच में भागत बानी जा। जब कवनो धन पावत बानी जा, कवनो मनोरंजन मिलत बा तउ खुश होइत बानी जा। पर ई सब तो अस्थायी बा। ई अध्याय हम के याद दिलावत बा कि जे चीज सच्च में अंतहीन बा, ओकरा तक पहुँचा के जीवन में सच्ची शांति मिल सकत बा। बाहरी चीज नीरस लागत बा काहें कि ई तो बाहर से बा, भीतर के चाह नीरस नाहीं हो सकत।

आज मुझे क्या करना चाहिए?

आज एक क्षण खाली बइठी के अपन निज के गवैं। कवनो धन के न चिंता करीं, न कानि के। मन के शांत करीं अउर जानब की कोशिश करीं कि कवनो चीज के न चाह, न विरोध करीं। जे अंदर बा ओकरा में लीन हो जाइब।

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मेरा चिंतन

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