छोटका देश होई, थोड़का जन होई। जहाँ दस-बीस गुना बड़का उपकरण होईं मुदा इस्तेमाल ना होईं, जहाँ लोग मरने के डर से दूर ना जाईं। नाँव-नाँव के जहाज होईं मुदा काहू के काम ना आवीं। ढाल-तलवार होईं मुदा लड़ाई ना होई। लोगन के फेरु से भोथरा-गांठ के याद करावे जोग होईं। लोगन के खाना में स्वाद होई, कपड़ा में सोंदरबान होई, घर में आराम होई, रीति-रिवाज में खुशी होई। पड़ोस के देश दिखी, कुत्ता-मुर्गी के आवाज सुनी, बूढ़ा होके मरई तक लोगन में आवा-जाव ना होई।
गहरा चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
ई अध्याय सरल जीवन के सपना देखावे बा। छोटका राष्ट्र जहाँ लोग संतोष में रहीं, जहाँ युद्ध ना होई, जहाँ प्रकृति के साथ सरल जीवन बितावे जाई।
यह मुझसे कैसे संबंधित है?
हम जईनो दौलत आर शोहरत के पीछे भागे ला जेकरा में कभी संतोष ना होई। ई अध्याय हमका याद करावे बा कि सच्चा सुख सरलता में बा।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज कुछ घंटा तनी के लेली सरल जीवन के मजा लीं - सादा खाना खाईं, बिनु गजब के कपड़ा पहिरीं, आर प्रकृति के संग समय बिताईं।
In a little state with a small population, I would so order it, that, though there were individuals with the abilities of ten or a hundred men, there should be no employment of them; I would make the people, while looking on death as a grievous thing, yet not remove elsewhere (to avoid it).
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छोटका देश होई, थोड़का जन होई। जहाँ दस-बीस गुना बड़का उपकरण होईं मुदा इस्तेमाल ना होईं, जहाँ लोग मरने के डर से दूर ना जाईं। नाँव-नाँव के जहाज होईं मुदा काहू के काम ना आवीं। ढाल-तलवार होईं मुदा लड़ाई ना होई। लोगन के फेरु से भोथरा-गांठ के याद करावे जोग होईं। लोगन के खाना में स्वाद होई, कपड़ा में सोंदरबान होई, घर में आराम होई, रीति-रिवाज में खुशी होई। पड़ोस के देश दिखी, कुत्ता-मुर्गी के आवाज सुनी, बूढ़ा होके मरई तक लोगन में आवा-जाव ना होई।
मेरा चिंतन
What does this chapter inspire in you? How will you apply it?