अध्याय 14

देखल पर ना दिहली, कहल पर ना सुनल

视之不见名曰夷,听之不闻名曰希,搏之不得名曰微。此三者不可致诘,故混而为一。
其上不皦,其下不昧,绳绳不可名,复归于无物。是谓无状之状,无物之象,是谓惚恍。
迎之不见其首,随之不见其后。执古之道,以御今之有。能知古始,是谓道纪。
जे देखल जात हवे ओकर नाम 'इर' हवे, जे सुनल जात हवे ओकर नाम 'ही' हवे, जे पकड़ल जात हवे ओकर नाम 'वि' हवे। इ तीन के गहिराई से पूछल ना जाई सकत, एही से ई एक में मिल जाली हवे। ओकर ऊपरी भाग चमकदार ना हवे, नीचल भाग अंधियार ना हवे, लगातार बहत हवे, नाम ना दिआल जा सकत, फिर भी कुछ ना हवे। एकरा के कहल जात हवे 'बिना आकार के आकार, बिना चीज के चीज' एकरा के कहल जात हवे 'धुंधलापन'। सामने से भेंट कई त ओकर सुरू ना दिहली, पिछवा से अवलोकन कई त ओकर अंत ना दिहली। पुरान मार्ग के पकड़ के वर्तमान के चीजन के नियंत्रित करल जाय सकत हवे। आदिमकाल के जाने वाला के जानल से एकरा के 'ताओ के क्रम' कहल जाला।

गहरा चिंतन

यह अध्याय किस बारे में है?

ई अध्याय ताओ के बारे में बतावत हवे जे देखल ना होई, सुनल ना होई, आओर पकड़ल ना होई। ई तीनों से परे हवे आओर एक हवे। ई ना चमकत हवे ना अंधियार हवे, एकरा के नाम ना दिआल जा सकत।

यह मुझसे कैसे संबंधित है?

हमनी के जीवन में बहुत कछु अछा जे समझ में ना आवत हवे। प्रकृति के ताकत, इंसान के भावना, आओर ब्रह्मांड के रहस्य - ई सब बीचे में अइसन कुछु हवे जे ना देखल जाई सकत हवे ना पकड़ल जाई।

आज मुझे क्या करना चाहिए?

आज कुछु ऐसन के खोजल जाय जे ना देखल जा सकत, ना सुनल जा सकत - जइसे कि हवा, प्रेम, या आशा। बस चुपचाप बैठ के ओकरा के महसूस करल जाय।

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मेरा चिंतन

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