एहि अध्यायमे कहल गेल अछि जे नदी आउर समुद्र कियाके सबसँ बड़का अछि? एकर कारण अछि जे ओ लोकसँ नीचाँ रहै छथि। ओ लोक जे चाहै छथि जे लोक ओकरा आदर करू, ओकरा पहिने सँ सेवक बनबाक चाही। जे नैत बूझै छथि ओकरा नीचा करब, जे आगु रहब चाहै छथि ओकरा पाछु रहब।
Key Concepts
下
不争
百谷王
身后
Cite This Chapter
Laozi, Tao Te Ching, Chapter 66, "नदी आउर समुद्र कियाके सब घाटीकें राजा कहल जाए छथि", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/mai/chapters/66/
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नदी आउर समुद्र कियाके सब घाटीकें राजा कहल जाए छथि? एकर कारण अछि जे ओ लोकसँ नीचाँमे रहै छथि, एही कारण ओ सब घाटीकें राजा बनि सकै छथि। एही कारण जदि लोकसँ ऊपर रहब चाहै छियो त पहिने सँ लोकसँ नीचाँ बूझब। जदि लोकसँ आगु रहब चाहै छियो त अपन शरीर कें पाछु करू। एही कारण संत जऊर ऊपर रहै छथि, लोक ओकरा भार नै मानै छथि; जऊर आगु रहै छथि, लोक ओकरा क्षति नै करै छथि। एही कारण संसार ओकरा खुशी सँ अगुआए बिना थकै छै। एकर कारण अछि जे ओ कोनो होड़ नै करै छथि, एही कारण संसारमे कोनो ओकरा साथ होड़ नै करि सकै छै।
गहन चिंतन
ई अध्याय की बारे में बा?
एहि अध्यायमे कहल गेल अछि जे नदी आउर समुद्र कियाके सबसँ बड़का अछि? एकर कारण अछि जे ओ लोकसँ नीचाँ रहै छथि। ओ लोक जे चाहै छथि जे लोक ओकरा आदर करू, ओकरा पहिने सँ सेवक बनबाक चाही। जे नैत बूझै छथि ओकरा नीचा करब, जे आगु रहब चाहै छथि ओकरा पाछु रहब।
एहि कें हमरा सँ की संबंध?
हम अउर लोकसँ अक्सर बड़ाई लेल यत्न करै छिऊ। मुदा जऊर हम लोककें अगुआबए चाहै छिऊ त ओकरा बजाय, हम सेवा कें भाव सँ लोककें नीचाँ बूझब।
आइ हम की करी?
आज कोनो एकटा लोक जे हमरा नीचा समझै छै ओकरा सहायता करू। अपन परिचय बिना कोनो काम करू आउर देखू जे अउर लोक कियाबए कहै छथि।
That whereby the rivers and seas are able to receive the homage and tribute of all the valley streams, is their skill in being lower than they; it is thus that they are the kings of them all. So it is that the sage (ruler), wishing to be above men, puts himself by his words below them.
AI आधुनिक
नदी आउर समुद्र कियाके सब घाटीकें राजा कहल जाए छथि? एकर कारण अछि जे ओ लोकसँ नीचाँमे रहै छथि, एही कारण ओ सब घाटीकें राजा बनि सकै छथि। एही कारण जदि लोकसँ ऊपर रहब चाहै छियो त पहिने सँ लोकसँ नीचाँ बूझब। जदि लोकसँ आगु रहब चाहै छियो त अपन शरीर कें पाछु करू। एही कारण संत जऊर ऊपर रहै छथि, लोक ओकरा भार नै मानै छथि; जऊर आगु रहै छथि, लोक ओकरा क्षति नै करै छथि। एही कारण संसार ओकरा खुशी सँ अगुआए बिना थकै छै। एकर कारण अछि जे ओ कोनो होड़ नै करै छथि, एही कारण संसारमे कोनो ओकरा साथ होड़ नै करि सकै छै।
मम विचार
एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?