एहि अध्यायमे कहल गेल छै कि ताओ केर कोनो नाम नहि छै, ओ सरल आर मौलिक छै। जे शासक ईकर अनुसरण करैत छथि, लोग ओकर अधीन होइत छथि। नाम आर सीमा के जानबाक बारेमे बताबल गेल छै।
Key Concepts
无名
朴
知止
江海
Cite This Chapter
Laozi, Tao Te Ching, Chapter 32, "ताओ सदाय नामहीन", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/mai/chapters/32/
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ताओ सदाय नामहीन छै, सरल आर मौलिक छै, ओ छोट भेला पर भी समस्त विश्व कोना ओकर अधीन नहि हो सकैत। राजा आर साम्राज्य यदि ईकर पालन करैत छथि, तँ समस्त प्राणी आपसँ आ बिनती करबाक चाहत छथि। आकाश आर पृथ्वी केर मिलनसँ मीठ बरखा बरसैत छै, लोग कोना आदेश दैत छथि, तथापि सबके बराबर वर्षा होइत छै। जखन सर्वप्रथम निर्माण होइत छै, तखन नामकरण होइत छै, नाम भेला पर भी ओ जानैत छथि कि कहाँ रुकू। जे रुकना जानैत छथि, ओकेर कहियो पतन नहि होइत। ताओ केर उपमा एहन छै जेना संसारमे ओ कोना बहैत छै - जेना नदीक गिरि-उपत्यका समुद्रमे बहि जाइत छथि।
गहन चिंतन
ई अध्याय की बारे में बा?
एहि अध्यायमे कहल गेल छै कि ताओ केर कोनो नाम नहि छै, ओ सरल आर मौलिक छै। जे शासक ईकर अनुसरण करैत छथि, लोग ओकर अधीन होइत छथि। नाम आर सीमा के जानबाक बारेमे बताबल गेल छै।
एहि कें हमरा सँ की संबंध?
हम अपन जीवनमे अपन पहचान वा नाम के अहंकारमे बाँधल नहि? परम्परा, प्रतिष्ठा वा मान्यता हमार सरल स्वभाव केर मारि दैत छथि? हम सर्वस्व केर सरलता कहाँ गँवा देलहै?
आइ हम की करी?
आज कोनो कार्य करू मुदा ओकर उद्देश्य नाम वा प्रसिद्धि नहि होय, मुदा सेवा होय। आपन अहंकार कम करू, आर सरल जीवन जिबू।
The Tao, considered as unchanging, has no name. Though in its primordial simplicity it may be small, the whole world dares not deal with (one embodying) it as a minister. If a feudal prince or the king could guard and hold it, all would spontaneously submit themselves to him.
AI आधुनिक
ताओ सदाय नामहीन छै, सरल आर मौलिक छै, ओ छोट भेला पर भी समस्त विश्व कोना ओकर अधीन नहि हो सकैत। राजा आर साम्राज्य यदि ईकर पालन करैत छथि, तँ समस्त प्राणी आपसँ आ बिनती करबाक चाहत छथि। आकाश आर पृथ्वी केर मिलनसँ मीठ बरखा बरसैत छै, लोग कोना आदेश दैत छथि, तथापि सबके बराबर वर्षा होइत छै। जखन सर्वप्रथम निर्माण होइत छै, तखन नामकरण होइत छै, नाम भेला पर भी ओ जानैत छथि कि कहाँ रुकू। जे रुकना जानैत छथि, ओकेर कहियो पतन नहि होइत। ताओ केर उपमा एहन छै जेना संसारमे ओ कोना बहैत छै - जेना नदीक गिरि-उपत्यका समुद्रमे बहि जाइत छथि।
मम विचार
एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?