ताओ वस्तुनुक गुप्त भंडार छै, साधु मनुखक रत्न छै, असाधु मनुखक आश्रय छै। सुंदर वचन प्रशंसा कमाबैछै, उत्तम आचरण मनुखके सम्मान दियैछै। मनुख यदि असाधु छै तऽ ओकरा त्यागबाक किए? एहिकारण राजा आओर मंत्रीके पद पर बैसाबाक बिनु, बहुमूल्य रत्न आओर घोड़ाक रथसँ बेसी, ई मार्ग बेसी उपयोगी छै। प्राचीन कालमे ई मार्गक इतना मूल्य किए देत? किए नहिं कि जे माङबै चाहैछै ओ पावैछै, आओर जे अपराधी छै ओ मुक्त पावैछै? एहिकारण ई संसारमे सबसँ बेसी मूल्यवान छै।
गहन चिंतन
ई अध्याय की बारे में बा?
ताओ वस्तुनुक रहस्यमय भंडार छै - गुणवान मनुखके तऽ रत्न, अगुणवानके तऽ आश्रय। कोनो मनुख असाधु किए नहिं, ताओ सबके साथ रहैछै। सुंदर वचन आओर सदाचार सबसँ बेसी मूल्यवान छै।
एहि कें हमरा सँ की संबंध?
मोर जीवनमे मैं गुणी आओर अगुणी दुनू प्रकारक मनुखसँ भेटैछिह। ताओ सबके आश्रय देइछै, ई मोरा बुझाय बिनु नहिं सकैछै जे किए अपराधीके प्रति दया राखब चाहीं।
आइ हम की करी?
आज मैं कोनो असुविधाजनक मनुखसँ सौम्य वचन बोलब आओर ओकरा नहिं त्यागब।
Tao has of all things the most honoured place. No treasures give good men so rich a grace; Bad men it guards, and doth their ill efface. Why was it that the ancients prized this Tao so much? Was it not because it could be got by seeking for it, and the guilty could escape (from the stains of their guilt) by it?
AI आधुनिक
ताओ वस्तुनुक गुप्त भंडार छै, साधु मनुखक रत्न छै, असाधु मनुखक आश्रय छै। सुंदर वचन प्रशंसा कमाबैछै, उत्तम आचरण मनुखके सम्मान दियैछै। मनुख यदि असाधु छै तऽ ओकरा त्यागबाक किए? एहिकारण राजा आओर मंत्रीके पद पर बैसाबाक बिनु, बहुमूल्य रत्न आओर घोड़ाक रथसँ बेसी, ई मार्ग बेसी उपयोगी छै। प्राचीन कालमे ई मार्गक इतना मूल्य किए देत? किए नहिं कि जे माङबै चाहैछै ओ पावैछै, आओर जे अपराधी छै ओ मुक्त पावैछै? एहिकारण ई संसारमे सबसँ बेसी मूल्यवान छै।
मम विचार
एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?