सदाचार सँ राज्य चलाबय, अनोखछछल युद्ध-कला सँ सेना केर प्रयोग करियै, आ कुनु नहि करबय केर माध्यम सँ समस्त संसार जीतियै। हम की जानैत अछि जे ई सबहि कथम正常工作 ? एहि तरह सँ: संसार मे जितना बेसी निषेध आ रोक-टोक होइत अछि, प्रजा उतना बेसी गरीब होइत जाइत अछि; लोग मे जितना बेसी हथियार होइत अछि, राज्य उतना बेसी अशान्त होइत जाइत अछि; मानव मे जितना बेसी चालाकी आ कला होइत अछि, अनोख-अनोख वस्तु उतना बेसी उत्पन्न होइत जाइत अछि; कानून-नियम जितना बेसी कठोर होइत अछि, चोर-डकैत उतना बेसी बढ़त जाइत अछि। एहि कारण एक ज्ञानी शासक कहैत अछि: मय यदि कुनु नहि करबऽ, तँ प्रजा स्वयं उन्नति करैत अछि; मय यदि शान्त रहबऽ, तँ प्रजा स्वयं सदाचारी होइत जाइत अछि; मय यदि कुनु नहि करबऽ, तँ प्रजा स्वयं धनवान होइत जाइत अछि; मय यदि कोनो लालसा नहि राखबऽ, तँ प्रजा स्वयं सरल होइत जाइत अछि।
गहन चिंतन
ई अध्याय की बारे में बा?
ई अध्याय कहैत अछि जे राज्य चलाबय कऽ तरीका सरल अछि - सदाचार सँ शासन करियै, अनोखा तरीका सँ युद्ध करियै, आ कुनु नहि करबय केर माध्यम सँ जय प्राप्त करियै। जखन बेसी नियम-कानून बनाओल जाइत अछि, लोग बेसी गरीब होइत जाइत अछि; जखन बेसी हथियार फैलाओल जाइत अछि, समाज बेसी अशान्त होइत जाइत अछि। सच्चा शासन सरल अछि - कुनु नहि करबय, शान्त रहबय, आ स्वतन्त्रता दियै।
एहि कें हमरा सँ की संबंध?
ई अध्याय केवल राज्य चलाबय कऽ नहि, अपितु जीवन केर सबहि क्षेत्र मे लागू अछि। जे माता-पिता बेसी कठोर नियम बनाबैत अछि, बालक उतना बेसी प्रतिरोधी होइत जाइत अछि। जे कार्यालय मे बेसी निगरानी होइत अछि, कर्मचारी उतना बेसी उत्पादकता खोबयत अछि। यदि हम अपन जीवन मे कोनो क्षेत्र केर उपर नियंत्रण राखबय केर प्रयास करब, तखन परिणाम विपरीत हुइ सकैत अछि।
आइ हम की करी?
आजुक दिन मे कोनो एक क्षेत्र चुनियै जहाँ हम बेसी नियंत्रण राखबय केर प्रयास करैत छी - हो सकैत अछि बालक केर शिक्षा, हो सकैत अछि कार्यालय केर प्रक्रिया। ओहि क्षेत्र मे कुनु नहि करबय केर सिद्धान्त लागू करियै आ देखियै जे किछु दिन मे किछ�ु होइत अछि।
A state may be ruled by (measures of) correction; weapons of war may be used with crafty dexterity; (but) the kingdom is made one's own (only) by freedom from action and purpose. Therefore a sage has said, 'I will do nothing (of purpose), and the people will be transformed of themselves.'
AI आधुनिक
सदाचार सँ राज्य चलाबय, अनोखछछल युद्ध-कला सँ सेना केर प्रयोग करियै, आ कुनु नहि करबय केर माध्यम सँ समस्त संसार जीतियै। हम की जानैत अछि जे ई सबहि कथम正常工作 ? एहि तरह सँ: संसार मे जितना बेसी निषेध आ रोक-टोक होइत अछि, प्रजा उतना बेसी गरीब होइत जाइत अछि; लोग मे जितना बेसी हथियार होइत अछि, राज्य उतना बेसी अशान्त होइत जाइत अछि; मानव मे जितना बेसी चालाकी आ कला होइत अछि, अनोख-अनोख वस्तु उतना बेसी उत्पन्न होइत जाइत अछि; कानून-नियम जितना बेसी कठोर होइत अछि, चोर-डकैत उतना बेसी बढ़त जाइत अछि। एहि कारण एक ज्ञानी शासक कहैत अछि: मय यदि कुनु नहि करबऽ, तँ प्रजा स्वयं उन्नति करैत अछि; मय यदि शान्त रहबऽ, तँ प्रजा स्वयं सदाचारी होइत जाइत अछि; मय यदि कुनु नहि करबऽ, तँ प्रजा स्वयं धनवान होइत जाइत अछि; मय यदि कोनो लालसा नहि राखबऽ, तँ प्रजा स्वयं सरल होइत जाइत अछि।
मम विचार
एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?