Chapter 58

मौन शासनक परम्परा

Quick Answer

ई अध्याय कहैत अछि जे शासनक तरीका कें प्रजाक स्वभाव बदलि दैत अछि। जखन शासन कोमल अछि, तखन प्रजा समृद्ध अछि; जखन कठोर अछि, तखन प्रजा दरिद्र अछि। दुःख आनन्द एकहिसँ दोसरमे जुड़ल अछि - दुःखमे आनन्द लुकल अछि आ आनन्दमे दुःख। ई कें कोन समझैत अछि जे ई स्थिति निरन्तर बदलैत रहैत अछि? संत लोक नैतिक अछि मुदा क्रूर नहि, शुद्ध अछि मुदा आघात नहि करयत, सीधा अछि मुदा अशिष्ट नहि।

Key Concepts

  • 祸福
  • 闷闷
  • 政治

Cite This Chapter

Laozi, Tao Te Ching, Chapter 58, "मौन शासनक परम्परा", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/mai/chapters/58/

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其政闷闷,其民淳淳;其政察察,其民缺缺。
祸兮福之所倚,福兮祸之所伏。孰知其极?其无正。正复为奇,善复为妖。人之迷,其日固久。
是以圣人方而不割,廉而不刿,直而不肆,光而不耀。
जतय शासन निपूर्ण अछि, उतय प्रजा सम्पूर्ण अछि। जतय शासन कठोर अछि, उतय प्रजा दरिद्र अछि। आनन्द सँ दुःख अछि, दुःख सँ आनन्द अछि। एहि दुनुक अन्त कें कोन जानैत अछि? ई सदा एकहिसँ दोसरमे बदलैत रहैत अछि। भलाई बुराइमे आओर बुराई भलाइमे बदलैत रहैत अछि। मनुख्यक मोह अबितो बहुत पुरान अछि। एहि कारण संत लोक सीधा अछि मुदा काटय नहि जाइत, शुद्ध अछि मुदा घाय नहि लगावयत, खरा अछि मुदा उद्धत नहि अछि, चमकैत अछि मुदा दीपिक नहि जरावयत।

गहन चिंतन

ई अध्याय की बारे में बा?

ई अध्याय कहैत अछि जे शासनक तरीका कें प्रजाक स्वभाव बदलि दैत अछि। जखन शासन कोमल अछि, तखन प्रजा समृद्ध अछि; जखन कठोर अछि, तखन प्रजा दरिद्र अछि। दुःख आनन्द एकहिसँ दोसरमे जुड़ल अछि - दुःखमे आनन्द लुकल अछि आ आनन्दमे दुःख। ई कें कोन समझैत अछि जे ई स्थिति निरन्तर बदलैत रहैत अछि? संत लोक नैतिक अछि मुदा क्रूर नहि, शुद्ध अछि मुदा आघात नहि करयत, सीधा अछि मुदा अशिष्ट नहि।

एहि कें हमरा सँ की संबंध?

मेरा जीवनमे हम देखैत छी जे जखन हम नियम कें सख्त बनावैत छी, तखन परिवारमे तनाव बढ़ि जाइत अछि। परम्पराक विरुद्ध भोग अछि - कोनो काज सफल होबय मे कठिनाई अछि मुदा ओही कठिनाई सँ हम सीखैत छी। शान्त रहबय मे गुप्त शक्ति अछि।

आइ हम की करी?

आजुक दिनमे हम कोनो एक कार्य नीक नीयत सँ करब, बिनु दोसरक भलाइ बिगाड़य। कोनो स्थितिमे निर्णय लैत समय कोमल रहब आ अहंकार नहि करब।

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मम विचार

एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?

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