Chapter 26
भारी वस्तु हलकी कें मूल छै
मूल
重为轻根,静为躁君。
是以圣人终日行不离辎重。虽有荣观,燕处超然。
奈何万乘之主,而以身轻天下?轻则失本,躁则失君。
是以圣人终日行不离辎重。虽有荣观,燕处超然。
奈何万乘之主,而以身轻天下?轻则失本,躁则失君。
अनुवाद
भारी वस्तु हलकी कें मूल छै, शांत वस्तु उत्तेजना कें स्वामी छै। एहि कारण संत पुरुष सदा अपन भारी सामान के संग रखैत छथि। यद्यपि ओ सब कुछ देखि सकैत छथि, परंतु ओ सब मे शांत रहैत छथि। परंतु जे कोनो राजा केरा सेना ले कें आबैत छै, ओ कें केंनो रूप स अपन देह कें हलका नैं बनावय चाही। हलका बनाएब से मूल खो जाएब, उत्तेजित बनाएब से स्वामी खो जाएब।
गहन चिंतन
ई अध्याय की बारे में बा?
ई अध्याय कहैत छल जे स्थिरता आ शांति कें महत्व छै। भारी वस्तु हलकी कें आधार छै, आरु शांति उत्तेजना कें स्वामी छै। जे राजा हलका-फुल्का होएय छै, ओ अपन साम्राज्य खो दैत छै।
एहि कें हमरा सँ की संबंध?
मेरा जीवन में, कभी-कभी हम हलका-फुल्का सोचैत छनि आरु ओहि स जल्दबाजी करैत छनि। परंतु ई अध्याय हमरा याद दिलावैत छल जे स्थिर रहब आवश्यक छै।
आइ हम की करी?
आज जे कार्य करब, ओकरा मे धैर्य राखब। कवैं नैं करब, शांत रहब, आरु निर्णय लेवा में समय लेब।
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मम विचार
एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?