Chapter 28

शक्तिके जानब, गोण हेबाक राखब

知其雄,守其雌,为天下谿。为天下谿,常德不离,复归于婴儿。
知其白,守其黑,为天下式。为天下式,常德不忒,复归于无极。
知其荣,守其辱,为天下谷。为天下谷,常德乃足,复归于朴。
朴散则为器,圣人用之则为官长。故大制不割。
शक्तिके जानब, गोण हेबाक राखब—एहिसँ संसारक उपत्यका हुअए। संसारक उपत्यका हुइआई, सदाक धर्म हराबऽ नहि जाइत, आ दोषहीन शिशुमे फिरि जाइत। श्वेतताके जानब, कालोपरोगी हेबाक राखब—एहिसँ संसारक आदर्श हुअए। संसारक आदर्श हुइआई, सदाक धर्ममे कोनो भूल नहि हुअए, आ अनंतमे फिरि जाइत। महत्ताके जानब, अपमान हेबाक राखब—एहिसँ संसारक घाटी हुअए। संसारक घाटी हुइआई, सदाक धर्म पर्याप्त हुअए, आ सरलतामे फिरि जाइत। सरलता जखन बिखराइ जाइत तँ ओ वस्तु बन जाइत, आ बुद्धिमान व्यक्ति एकरा प्रशासक बनाबऽआए। एहिसँ महान शासन काटबऽ नहि हुअए।

गहन चिंतन

ई अध्याय की बारे में बा?

एहि अध्यायमे कहल गेल अछि जे शक्तिशाली हेबाक जानब महत्वपूर्ण अछि, किन्तु गोण हेबाक रूपमे रहब अई बेशकीर्त अछि। जेना नदी उपत्यकामे बहि कऽ सदा नीचाइ बहैछ, तहिना गोण हेबाक वचन शक्तिसभ जैसऽ नैतिक गुण हुअछि। जखन कोनो व्यक्ति द्वैत (जोड़ि-चोड़ि) कऽ अस्तित्व स्वीकार करैछ आ विपरीत धारा कऽ साथ बहैछ, तखन ओ अपन आदर्श सदा कऽ बनाइ राखऽआए। सरलता जखन बिखुराइ जाइत तखन ओ विभिन्न रूप लैछ, किन्तु मूल सरलता नष्ट नहि हुइत।

एहि कें हमरा सँ की संबंध?

हम सदा शक्तिशाली हेबाक कोशिश करऽ छी, किन्तु ई अध्याय हमके सिखावऽआए जे सच्चा शक्ति गोण हेबाकमे अछि। मानैछ जे मैं मेहनती आ प्रतिस्पर्धी हेबाक चाहऽ छी, किन्तु गोण रहब, सुनब, आ सहनशील हेबाक हमरे जीवनके अछि अई बेसी संतुलित करऽआए। जखन हम अपन सीमा जानऽ छी आ नम्रता स्वीकार करऽ छी, तखन हम बेसी शांति अनुभव करऽ छी।

आइ हम की करी?

आजि हम कोनो एकटा क्षेत्र चुनब जतय हम शक्ति दिखाबैछी—जेना बातचीत, कार्यस्थल, अथवा परिवारमे—आ जानबुझ कऽ वहाँ गोणता स्वीकार करब। कोनो विचार जे आब सुनबाक बजाय बोलबाक हेलॉ, ओकरा बोलबाक कऽ बजाय सुनब।

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मम विचार

एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?

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