जब लोग शासन से नहीं डरते, तब बड़ा भय उत्पन्न होता है। उनके निवास में हस्तक्षेप न करो, उनके जीवन को दबाओ मत। केवल जब तुम उन्हें नहीं दबाते, तब वे असंतुष्ट नहीं होते। इसलिए संत स्वयं को जानता है, पर स्वयं को प्रदर्शित नहीं करता; स्वयं से प्रेम करता है, पर स्वयं को महत्व नहीं देता। इसलिए वह एक को छोड़ दूसरे को ग्रहण करता है।
गहन चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
यह अध्याय सत्ता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन की बात करता है। सच्चा नेतृत्व दबाव नहीं, बल्कि आत्म-जागरूकता और विनम्रता से आता है।
इसका मुझसे क्या संबंध है?
मैं अपने जीवन में दूसरों पर नियंत्रण रखने की कोशिश करता हूँ, जो अक्सर विपरीत परिणाम लाता है। मुझे आत्म-ज्ञान और विनम्रता से काम लेना चाहिए।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज, किसी पर नियंत्रण करने की बजाय, उसे स्वतंत्रता दें और अपने आचरण से प्रेरित करें।
When the people do not fear what they ought to fear, that which is their great dread will come on them. Therefore the sage knows (these things) of himself, but does not parade (his knowledge); loves, but does not (appear to set a) value on, himself.
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जब लोग शासन से नहीं डरते, तब बड़ा भय उत्पन्न होता है। उनके निवास में हस्तक्षेप न करो, उनके जीवन को दबाओ मत। केवल जब तुम उन्हें नहीं दबाते, तब वे असंतुष्ट नहीं होते। इसलिए संत स्वयं को जानता है, पर स्वयं को प्रदर्शित नहीं करता; स्वयं से प्रेम करता है, पर स्वयं को महत्व नहीं देता। इसलिए वह एक को छोड़ दूसरे को ग्रहण करता है।
मेरा चिंतन
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