अध्याय 57
सीधाई से शासन
मूल
以正治国,以奇用兵,以无事取天下。吾何以知其然哉?以此:
天下多忌讳,而民弥贫;民多利器,国家滋昏;人多伎巧,奇物滋起;法令滋彰,盗贼多有。
故圣人云:我无为而民自化,我好静而民自正,我无事而民自富,我无欲而民自朴。
天下多忌讳,而民弥贫;民多利器,国家滋昏;人多伎巧,奇物滋起;法令滋彰,盗贼多有。
故圣人云:我无为而民自化,我好静而民自正,我无事而民自富,我无欲而民自朴。
अनुवाद
सीधाई से देश पर शासन करो, चालाकी से युद्ध करो, और बिना हस्तक्षेप के संसार को प्राप्त करो। मैं कैसे जानता हूँ कि यह सच है? इस प्रकार: जितने अधिक निषेध होंगे, लोग उतने ही गरीब होंगे; जितने अधिक हथियार होंगे, देश उतना ही अव्यवस्थित होगा; जितनी अधिक कुशलताएँ होंगी, उतनी ही अधिक विचित्र वस्तुएँ उत्पन्न होंगी; जितने अधिक कानून होंगे, उतने ही अधिक चोर होंगे। इसलिए संत कहते हैं: मैं कुछ नहीं करता, और लोग स्वयं परिवर्तित होते हैं; मैं शांत रहता हूँ, और लोग स्वयं सीधे होते हैं; मैं हस्तक्षेप नहीं करता, और लोग स्वयं समृद्ध होते हैं; मैं इच्छा नहीं रखता, और लोग स्वयं सादगी में लौटते हैं।
गहन चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
यह अध्याय बताता है कि सच्चा शासन और समृद्धि हस्तक्षेप, नियमों और इच्छाओं से नहीं, बल्कि अहस्तक्षेप, शांति और सादगी से आती है।
इसका मुझसे क्या संबंध है?
यह मुझे याद दिलाता है कि मेरे जीवन में भी—जितना मैं नियंत्रण और योजना छोड़ता हूँ, उतनी ही शांति और समृद्धि स्वाभाविक रूप से आती है।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज, एक काम को बिना किसी योजना या दबाव के करें—जैसे बिना किसी लक्ष्य के टहलना—और देखें कि यह कैसे स्वाभाविक रूप से होता है।
संबंधित अध्याय
मेरा चिंतन
यह अध्याय आपको क्या प्रेरणा देता है? आप इसे कैसे लागू करेंगे?