अध्याय 29
संसार को नियंत्रित करने का प्रयास
मूल
将欲取天下而为之,吾见其不得已。天下神器,不可为也。为者败之,执者失之。
故物或行或随,或嘘或吹,或强或羸,或挫或隳。
是以圣人去甚,去奢,去泰。
故物或行或随,或嘘或吹,或强或羸,或挫或隳。
是以圣人去甚,去奢,去泰。
अनुवाद
जो संसार को पकड़कर उसे नियंत्रित करना चाहता है, मैं देखता हूँ कि वह असफल होगा। संसार एक रहस्यमय उपकरण है, इसे नियंत्रित नहीं किया जा सकता। जो इसे नियंत्रित करना चाहता है, वह इसे नष्ट कर देता है; जो इसे पकड़ना चाहता है, वह इसे खो देता है। इसलिए, चीजें कभी आगे बढ़ती हैं, कभी पीछे; कभी धीमी होती हैं, कभी तेज़; कभी मजबूत, कभी कमजोर; कभी सुरक्षित, कभी खतरे में। इसलिए संत अतिवाद, विलासिता और आराम को छोड़ देता है।
गहन चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
यह अध्याय चेतावनी देता है कि संसार को बलपूर्वक नियंत्रित करने का प्रयास विनाश लाता है। संत जानता है कि जीवन स्वाभाविक रूप से बदलता है, और वह अतिवाद और आराम को छोड़कर संतुलन में रहता है।
इसका मुझसे क्या संबंध है?
मैं अक्सर अपने जीवन या दूसरों को नियंत्रित करने की कोशिश करता हूँ, लेकिन यह अध्याय मुझे सिखाता है कि यह व्यर्थ है। जब मैं छोड़ देता हूँ और चीजों को अपने प्राकृतिक पथ पर चलने देता हूँ, तो मैं कम तनाव और अधिक शांति पाता हूँ।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज, एक ऐसी स्थिति में जहाँ आप नियंत्रण चाहते हैं, जानबूझकर पीछे हटें और चीजों को अपने आप होने दें—जैसे किसी सहकर्मी को अपना काम करने देना या योजना को बदलने देना।
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