सबसे बड़ी पूर्णता अपूर्ण लगती है, पर उसका उपयोग कभी समाप्त नहीं होता। सबसे बड़ी परिपूर्णता खाली लगती है, पर उसका उपयोग कभी खत्म नहीं होता। सबसे बड़ी सीधी रेखा टेढ़ी लगती है, सबसे बड़ी कुशलता अनाड़ी लगती है, सबसे बड़ी वाक्पटुता हकलाने वाली लगती है। तेज़ी ठंड पर विजय पाती है, शांति गर्मी पर विजय पाती है। शांति और स्पष्टता संसार का मार्गदर्शन करती है।
गहन चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
यह अध्याय बताता है कि सच्ची पूर्णता, कुशलता और शक्ति अक्सर अपने विपरीत रूप में प्रकट होती है। शांति और स्पष्टता ही सच्ची शक्ति हैं।
इसका मुझसे क्या संबंध है?
मेरे जीवन में, मैं अक्सर दिखावे और बाहरी कुशलता पर ध्यान देता हूँ। यह अध्याय मुझे सिखाता है कि सच्ची महानता विनम्रता और शांति में छिपी होती है।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज, किसी कार्य को पूर्णता से करने की चिंता छोड़ें और उसे सरलता और शांति से करें। देखें कि यह कैसे अधिक प्रभावी होता है।
Who thinks his great achievements poor Shall find his vigour long endure. Of greatest fulness, deemed a void, Exhaustion ne'er shall stem the tide. Do thou what's straight still crooked deem; Thy greatest art still stupid seem, And eloquence a stammering scream. Purity and stillness give the correct law to all under heaven.
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सबसे बड़ी पूर्णता अपूर्ण लगती है, पर उसका उपयोग कभी समाप्त नहीं होता। सबसे बड़ी परिपूर्णता खाली लगती है, पर उसका उपयोग कभी खत्म नहीं होता। सबसे बड़ी सीधी रेखा टेढ़ी लगती है, सबसे बड़ी कुशलता अनाड़ी लगती है, सबसे बड़ी वाक्पटुता हकलाने वाली लगती है। तेज़ी ठंड पर विजय पाती है, शांति गर्मी पर विजय पाती है। शांति और स्पष्टता संसार का मार्गदर्शन करती है।
मेरा चिंतन
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