अध्याय 44

नाम या शरीर, कौन अधिक प्रिय?

Quick Answer

यह अध्याय बताता है कि नाम, धन और लाभ की अत्यधिक चाहत हानिकारक होती है। संतोष और सीमा का ज्ञान ही सच्ची सुरक्षा और स्थायित्व देता है।

Key Concepts

  • 知足
  • 知止
  • 长久

Cite This Chapter

Laozi, Tao Te Ching, Chapter 44, "नाम या शरीर, कौन अधिक प्रिय?", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/hi/chapters/44/

Classical Chinese, translation, and AI reflection are shown separately; cite this chapter URL for references.

名与身孰亲?身与货孰多?得与亡孰病?
是故甚爱必大费,多藏必厚亡。
知足不辱,知止不殆,可以长久。
नाम या शरीर, कौन अधिक प्रिय? शरीर या धन, कौन अधिक मूल्यवान? लाभ या हानि, कौन अधिक पीड़ादायक? अत्यधिक प्रेम बड़ी कीमत माँगता है, अत्यधिक संचय बड़ी हानि लाता है। संतोषी को अपमान नहीं होता, सीमा जानने वाले को खतरा नहीं होता, और वे सदा बने रह सकते हैं।

गहन चिंतन

यह अध्याय किस बारे में है?

यह अध्याय बताता है कि नाम, धन और लाभ की अत्यधिक चाहत हानिकारक होती है। संतोष और सीमा का ज्ञान ही सच्ची सुरक्षा और स्थायित्व देता है।

इसका मुझसे क्या संबंध है?

मेरे जीवन में, मैं अक्सर प्रसिद्धि या धन के पीछे भागता हूँ, लेकिन यह अध्याय मुझे सिखाता है कि वास्तविक सुख संतोष में है। जब मैं सीमाएँ जानता हूँ, तो मैं शांति से रहता हूँ।

आज मुझे क्या करना चाहिए?

आज, अपनी इच्छाओं की सूची बनाएँ और देखें कि कौन सी अनावश्यक हैं। उन्हें छोड़ने का प्रयास करें और संतोष का अभ्यास करें।

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