अध्याय 26

भारीपन और हल्कापन

Quick Answer

यह अध्याय भारीपन और शांति को हल्केपन और उत्तेजना पर प्राथमिकता देता है। संत अपनी जड़ों और केंद्र से जुड़ा रहता है, बाहरी प्रदर्शनों से प्रभावित नहीं होता। एक शासक को अपने शरीर और राज्य को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि हल्कापन विनाश लाता है।

Key Concepts

  • 辎重
  • 沉稳

Cite This Chapter

Laozi, Tao Te Ching, Chapter 26, "भारीपन और हल्कापन", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/hi/chapters/26/

Classical Chinese, translation, and AI reflection are shown separately; cite this chapter URL for references.

重为轻根,静为躁君。
是以圣人终日行不离辎重。虽有荣观,燕处超然。
奈何万乘之主,而以身轻天下?轻则失本,躁则失君。
भारीपन हल्केपन की जड़ है, शांति उत्तेजना की स्वामी है। इसलिए, संत पूरे दिन अपने भारी बोझ के साथ चलता है। हालाँकि उसके पास शानदार दृश्य हैं, वह शांति से उनसे परे रहता है। एक साम्राज्य के स्वामी के लिए, वह अपने शरीर को दुनिया से हल्का कैसे समझ सकता है? हल्कापन जड़ खो देता है, उत्तेजना स्वामी खो देती है।

गहन चिंतन

यह अध्याय किस बारे में है?

यह अध्याय भारीपन और शांति को हल्केपन और उत्तेजना पर प्राथमिकता देता है। संत अपनी जड़ों और केंद्र से जुड़ा रहता है, बाहरी प्रदर्शनों से प्रभावित नहीं होता। एक शासक को अपने शरीर और राज्य को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि हल्कापन विनाश लाता है।

इसका मुझसे क्या संबंध है?

मेरे जीवन में, मैं अक्सर हल्की उत्तेजनाओं—सोशल मीडिया, भागदौड़—में खो जाता हूँ। यह मुझे याद दिलाता है कि मुझे अपनी गहरी जड़ों, अपनी शांति और स्थिरता को पकड़ना चाहिए। केवल तभी मैं जीवन के तूफानों का सामना कर सकता हूँ।

आज मुझे क्या करना चाहिए?

आज, एक काम करते समय धीमा हो जाएँ—चाहे वह खाना हो या चलना। हर क्रिया में पूरी तरह उपस्थित रहें, जैसे कि आप एक भारी बोझ ढो रहे हों, और देखें कि कैसे शांति आपको केंद्रित करती है।

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मेरा चिंतन

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