Chapter 37

दा सदा निर कर्मा हे

道常无为而无不为。侯王若能守之,万物将自化。化而欲作,吾将镇之以无名之朴。无名之朴,夫亦将无欲。不欲以静,天下将自定。
दा सदा निर कर्मा हे आर न कर्मा नेईं। जे हुकुम खाता होई, जेकरे पालण करे, सारा जगत आपणे-आपणे बदल जाइगा। जे बदलावल नै कुछ चाहे, में ओकरा नांव-हीन सादगी नै दबाउंगा। नांव-हीन सादगी सूं लालच भी नै रहेगा। लालच नै होई त पंगत हे, दुनिया आपणे-आपणे ठहर जाइगी।

गहरी सोच

ऐ चैप्टर बारे में क्या ऐ?

ई अध्याय बत्ते कि दा सदा बिना कोशिश के काम करे हे आर सब कुछ हो जाहे हे। जे राजा होई जेकरा पालण करे, सारी चीज़ां आपणे-आपणे सही हो जाइगा। जे कुछ चाहने लगे, में ओकरा सादगी नै दबाउंगा, जेकरे सूं लालच भी मिट जाइगा।

एह मेरे कन्ने किवें संबंधित ऐ?

मेरी ज़िन्दगी में, जे में सदा तनाव में रेहता रेह, ई बात मुझे समझा हे कि हर वकत होशियारी नै करणे की ज़रूरत नेई। जे में शांति नै रखता रेह, सब कुछ अपणे आप ठीक हो जाहे हे।

संबंधित अध्याय

मेरी सोच

What does this chapter inspire in you? How will you apply it?

Ask Laotzu About This Chapter Full chat →