ई अध्याय कहेला कि जब लोग ताह के अनुसार जियें, त दुनिया में शांति आ खुशी रहेला। जब लोग संतोष सीख लेलें आ कम चाहत करे लें, त दुनिया में युद्ध आ मुसीबत ना होखे। जाने के चाहत आ पावे के लालच से ही सबसे बड़का दुख होला।
Key Concepts
知足
无道
有道
Cite This Chapter
Laozi, Tao Te Ching, Chapter 46, "दुनिया में ताह होखे त कवना फायदा", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/bho/chapters/46/
Classical Chinese, translation, and AI reflection are shown separately; cite this chapter URL for references.
मूल
天下有道,却走马以粪。天下无道,戎马生于郊。
祸莫大于不知足,咎莫大于欲得。故知足之足,常足矣。
अनुवाद
जब संसार में ताह के रास्ता चलल जाला, त सब घोड़ा-गाड़ी खेत में जुटावल जालें आ बियाबन में छोड़ दिआ जाला। जब संसार में ताह ना होखे, त घोड़ा-गाड़ी बनियां पर दौड़त रहेला। सबसे बड़का मुसीबत इ छोड़ दिआ ना होखे के चाहत में बा, आ सबसे बड़का गलती इ छोड़ दिआ पावे के चाहत में बा। एही से, जे कोय आपन परसानी में संतोष मनावेला, ओकरा के हमेशा खुशी मिलत रहेला।
गहन चिंतन
एहि अध्याय में का बात होला?
ई अध्याय कहेला कि जब लोग ताह के अनुसार जियें, त दुनिया में शांति आ खुशी रहेला। जब लोग संतोष सीख लेलें आ कम चाहत करे लें, त दुनिया में युद्ध आ मुसीबत ना होखे। जाने के चाहत आ पावे के लालच से ही सबसे बड़का दुख होला।
एहि के मोहल्ला से का संबंध?
हमरा में भी कम ना होखे के भावना रहेला - हमेशा आउर पावे के इच्छा। एकरा से हमरा बरतन कभी-कभी खाली ना होता, आ हमेशा तनाव में रहेला। बिनु संतोष के, कोय भी कमाई काफी ना होला।
आज का करब?
आज हम जे कुछ बा, ओकरा पर धन्यवाद देवे के अभ्यास करी। जब कवनो नया चीज के इच्छा होखे, त पहिले आपस में कही कि 'अभी ई काफी बा'। एहि से मन के शांति मिली आ संतोष के भावना बढ़ी।
When the Tao prevails in the world, they send back their swift horses to (draw) the dung-carts. When the Tao is disregarded in the world, the war-horses breed in the border lands. There is no guilt greater than to sanction ambition; no calamity greater than to be discontented with one's lot; no fault greater than the wish to be getting.
एआई आधुनिक
जब संसार में ताह के रास्ता चलल जाला, त सब घोड़ा-गाड़ी खेत में जुटावल जालें आ बियाबन में छोड़ दिआ जाला। जब संसार में ताह ना होखे, त घोड़ा-गाड़ी बनियां पर दौड़त रहेला। सबसे बड़का मुसीबत इ छोड़ दिआ ना होखे के चाहत में बा, आ सबसे बड़का गलती इ छोड़ दिआ पावे के चाहत में बा। एही से, जे कोय आपन परसानी में संतोष मनावेला, ओकरा के हमेशा खुशी मिलत रहेला।
मोहना विचार
एहि अध्याय में रउआ के का प्रेरित करेला? रउआ एकरा केसे लागू करब?