अध्याय 19
संत-बुद्धि के त्याग
Quick Answer
ई अध्याय कहईस कि बड़का-बड़का बुद्धि-बिचार के त्याग दिआव त पर जबलोक के हित बढ़ जाईस। दया-धर्म, नीति-नियम, छल-कपट के त्याग से मनुष्य के असली प्रेम-भाव वापस आ जाईस। बाहर के आडंबर छोड़ देना चाहीं, सादगी में रहना चाहीं।
Key Concepts
- 绝圣
- 抱朴
- 寡欲
- 返璞归真
Cite This Chapter
Laozi, Tao Te Ching, Chapter 19, "संत-बुद्धि के त्याग", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/awa/chapters/19/
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Original
此三者以为文不足,故令有所属:见素抱朴,少私寡欲。
अनुवाद
गहरा चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
ई अध्याय कहईस कि बड़का-बड़का बुद्धि-बिचार के त्याग दिआव त पर जबलोक के हित बढ़ जाईस। दया-धर्म, नीति-नियम, छल-कपट के त्याग से मनुष्य के असली प्रेम-भाव वापस आ जाईस। बाहर के आडंबर छोड़ देना चाहीं, सादगी में रहना चाहीं।
यह मुझसे कैसे संबंधित है?
हम अक्सर पढ़ाई-लिखाई, बड़का नाम, सम्मान के पीछे भागईना। मन में ई लालच बा कि दुनिया में नाम कमावईन। पर ई अध्याय हमके समझावईस कि ए सब व्यर्थ बा। भीतर के सादगी-सच्चाई में ही शांति बा।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज कवनो एगो बड़का बाहरी चीज के त्याग करईन - चाहे ई एगो बड़का शब्द हो, एगो दिखावा हो, ya कवनो लालच हो। सादा रहे के कोशिश करईन।
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मेरा चिंतन
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