अध्याय 72
जब लोग डर के ना मानी
Quick Answer
जब लोग कवनो चीज से ना डरेला, तऽ बड़का मुसीबत आ जाई। लोगन के रहे खातिर जगह छोट ना कर, लोगन के जीवन पर बोझ ना डाल। जे ना दबावेला, से दबाये ना जाई। संत जन आपन बूझे के पता होखे बाकी दिखावा ना करेला। आपन हियरा जाने बाकी खुद के बड़ ना मानेला। एहि कारन संत दिखावा छोड़ के सच्चाई लेला।
Key Concepts
- 威
- 自知
- 自爱
Cite This Chapter
Laozi, Tao Te Ching, Chapter 72, "जब लोग डर के ना मानी", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/awa/chapters/72/
Classical Chinese, translation, and AI reflection are shown separately; cite this chapter URL for references.
Original
无狎其所居,无厌其所生。夫唯不厌,是以不厌。
是以圣人自知不自见,自爱不自贵。故去彼取此。
अनुवाद
जेहरा जगह में रहेला ओहके छोट ना कर, जेहरा जीवन जिएला ओहके थक ना कर।
जे ना थकावेला, से ना थकाये जाई।
एहि कारन संत जन आपन बूझे बिना दिखावा के, आपन पियारा बिना बड़ाई के।
एहि कारन ओहिमें दूसरा छोड़ के इहे लेला।
गहरा चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
जब लोग कवनो चीज से ना डरेला, तऽ बड़का मुसीबत आ जाई। लोगन के रहे खातिर जगह छोट ना कर, लोगन के जीवन पर बोझ ना डाल। जे ना दबावेला, से दबाये ना जाई। संत जन आपन बूझे के पता होखे बाकी दिखावा ना करेला। आपन हियरा जाने बाकी खुद के बड़ ना मानेला। एहि कारन संत दिखावा छोड़ के सच्चाई लेला।
यह मुझसे कैसे संबंधित है?
जब हम दूसरन पर दबाव डालेला जे मई जहाँ रहना चाहत बानी, जईना हम जीवन जिआवना चाहत बानी, तऽ लोग हमसे दूर भागेला। आज मई समझे के कोशिश करब जे दूसरन के जिंदगी में दखल ना देव, बाकी आपन बूझे के छोट रखव।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज कवनो एक बात छोड़ देब जे हम दूसरन के जीवन में बदले के कोशिश करत बानी। कहियो तक अपने सुझाव ना देब जब तक ना पूछे जाई।
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