पेर पर खड़ा नहीं रुक सकत, टस से मस नहीं जा सकत। आपन के देखे वाला अंधा हो जाई, आपन के सही माने वाला गवां देई, आपन के बड़ाई करे वाला का काम नहीं होई, आपन के उठाई करे वाला आगे नहीं बढ़ी सकत। देव के राह में एकरा के कह सकत बाना - बचा-बचाया खाना, अलउन चाल। जगत में सब के मन में घृणा आ जाई। एकरे बरजे देव के राह में चलने वाला असल बात से दूर रहिहा।
गहरा चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
पेर पर खड़ा होके देखे वाला कहाँ टिकी रही? जल्दी में हाथ पाँव मारे वाला कहाँ पहुँची? आपन के बड़ा समझे वाला के जगत में कोन मानी?
यह मुझसे कैसे संबंधित है?
हम सब में कबकबी होई बा - आपन के बड़ा दिखावे के, बाकिर या से कुछ नहीं मिलेगा। या अध्याय हम के सिखावे ला कि सादा रहना, अक品味 छोड़ना।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज कबकबी और दिखावा के बजाय सादा जीवन जिएहा। दूसरा के सामने आपन के बड़ाई न करीहा। जे मिला, ओकर में संतोष मानीहा।
He who stands on his tiptoes does not stand firm; he who stretches his legs does not walk (easily). (So), he who displays himself does not shine; he who asserts his own views is not distinguished; he who vaunts himself does not find his merit acknowledged; he who is self-conceited has no superiority allowed to him.
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पेर पर खड़ा नहीं रुक सकत, टस से मस नहीं जा सकत। आपन के देखे वाला अंधा हो जाई, आपन के सही माने वाला गवां देई, आपन के बड़ाई करे वाला का काम नहीं होई, आपन के उठाई करे वाला आगे नहीं बढ़ी सकत। देव के राह में एकरा के कह सकत बाना - बचा-बचाया खाना, अलउन चाल। जगत में सब के मन में घृणा आ जाई। एकरे बरजे देव के राह में चलने वाला असल बात से दूर रहिहा।
मेरा चिंतन
What does this chapter inspire in you? How will you apply it?