ई अध्याय कहेला कि जे काम शुरू में सहज बा ओकरा के सम्हाल ले के। बड़का-बड़का काम छोट-छोट शुरुआत से होला - बड़हन पेड़ा के बीजा से, ऊँच मंजिला के मिट्टी के ढेर से। जे कुछ जबरदस्ती करेला ओकरा में असफल हो जाई। पवित्र आदमी कुछ नइखे करत, एह से कुछ गँवावत नइखे। काम के अंत ले तक सावधानी से करे के चाहीं।
Key Concepts
微
始
慎终如始
自然
Cite This Chapter
Laozi, Tao Te Ching, Chapter 64, "जे बात ठिक बा ओकर रखवाली सहज", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/awa/chapters/64/
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जे बात ठिक-ठाक बा, ओकर रखवाली सहज होला।\nजे बात के संकेत नइखे भइल, ओकर योजना सहज बनाली जा सकत बा।\nजे कुछ नाजुक बा, ओकरा के तोड़ल सहज होला।\nजे कुछ बहुत सूदा बा, ओकरा के बिखेरल सहज होला।\nजे कुछ नइखे भइल बा, ओकरा के बनावे के कोशिश करे के चाहीं।\nजे कुछ बिगड़े के होखे, ओकरा के सुधारे के चाहीं।\n\nबड़हन पेड़ा के जोड़ सात गो छोट-छोट बीजा से होला।\nउँच मंजिला वाला महल सात गो छोट-छोट मिट्टी के ढेर से बनेला।\nहजार मील के राहा एक कदम से शुरू होला।\n\nजे कुछ करे के कोशिश करेला, ओकरा में असफलता मिलेला।\nजे कुछ पकड़ेला, ओकरा से हाथ छूट जाई।\nएह से पवित्र आदमी कुछ नइखे करत, एह से असफल नइखे होत।\nकुछ नइखे पकड़त, एह से कुछ गँवावत नइखे।\n\nलोग जे कुछ करत बाड़ें, त कबोर-कबोर ओकरा में असफल हो जात बाड़ें।\nपर जब अंत ले तक पहिले जैसन-ऐसन सावधानी राखी जाए, त कुछ भी खराब नइखे होई।\n\nएह से पवित्र आदमी के चाहत में सादगी बा,\nदुर्लभ चीजन के दाम नइखे पड़ेला।\nजे नइखे सीखायल जात, ओकरा के सीखेला,\nआ बाकी लोगन के भूल-सुधार करेला।\nएह से सबके स्वभाव के हिसाब से काम करेला, कुछ जबरदस्ती नइखे करेला।
गहरा चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
ई अध्याय कहेला कि जे काम शुरू में सहज बा ओकरा के सम्हाल ले के। बड़का-बड़का काम छोट-छोट शुरुआत से होला - बड़हन पेड़ा के बीजा से, ऊँच मंजिला के मिट्टी के ढेर से। जे कुछ जबरदस्ती करेला ओकरा में असफल हो जाई। पवित्र आदमी कुछ नइखे करत, एह से कुछ गँवावत नइखे। काम के अंत ले तक सावधानी से करे के चाहीं।
यह मुझसे कैसे संबंधित है?
हम अक्सर अपना जीवन में बड़का-बड़का सपना देखत बानी जा आ तुरंत निराश हो जात बानी जा। अब समझल बानी कि हर बड़का काम छोट-छोट कदम से शुरू होला। हमसे जब कुछ जबरदस्ती होखे त हम अक्सर गुस्सा हो जात बानी जा, पर अब सीखत बानी कि प्रकृति के रास्ता में काम करे से सब ठिक हो जाई।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज से एक छोटका काम चुनू जेकरा के बहुत दिन से टालत आइल बानी - चाहे ओकरा कोई चिट्ठी लिखे के होखे, कोई फोन करे के होखे, या कोई सफाई करे के होखे। एह काम के शुरू करू आ धैर्य राखू। याद राखू कि हर बड़का राहा एक कदम से शुरू होला।
That which is at rest is easily kept hold of; before a thing has given indications of its presence, it is easy to take measures against it. The tree which fills the arms grew from the tiniest sprout; the tower of nine storeys rose from a (small) heap of earth; the journey of a thousand li commenced with a single step.
AI Modern
जे बात ठिक-ठाक बा, ओकर रखवाली सहज होला।\nजे बात के संकेत नइखे भइल, ओकर योजना सहज बनाली जा सकत बा।\nजे कुछ नाजुक बा, ओकरा के तोड़ल सहज होला।\nजे कुछ बहुत सूदा बा, ओकरा के बिखेरल सहज होला।\nजे कुछ नइखे भइल बा, ओकरा के बनावे के कोशिश करे के चाहीं।\nजे कुछ बिगड़े के होखे, ओकरा के सुधारे के चाहीं।\n\nबड़हन पेड़ा के जोड़ सात गो छोट-छोट बीजा से होला।\nउँच मंजिला वाला महल सात गो छोट-छोट मिट्टी के ढेर से बनेला।\nहजार मील के राहा एक कदम से शुरू होला।\n\nजे कुछ करे के कोशिश करेला, ओकरा में असफलता मिलेला।\nजे कुछ पकड़ेला, ओकरा से हाथ छूट जाई।\nएह से पवित्र आदमी कुछ नइखे करत, एह से असफल नइखे होत।\nकुछ नइखे पकड़त, एह से कुछ गँवावत नइखे।\n\nलोग जे कुछ करत बाड़ें, त कबोर-कबोर ओकरा में असफल हो जात बाड़ें।\nपर जब अंत ले तक पहिले जैसन-ऐसन सावधानी राखी जाए, त कुछ भी खराब नइखे होई।\n\nएह से पवित्र आदमी के चाहत में सादगी बा,\nदुर्लभ चीजन के दाम नइखे पड़ेला।\nजे नइखे सीखायल जात, ओकरा के सीखेला,\nआ बाकी लोगन के भूल-सुधार करेला।\nएह से सबके स्वभाव के हिसाब से काम करेला, कुछ जबरदस्ती नइखे करेला।
मेरा चिंतन
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