अध्याय 33
जानेवाला के बुद्धि
Original
अनुवाद
गहरा चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
जानना दूसरन के बारे में बुद्धि हवे, बाकी जानना आपने के बारे में प्रबुद्धता हवे। अपने पर जितला दूसरन पर जितला से बड़का विजय हवे। संतोष में धन हवे, लगातार मेहनत में इच्छा हवे। अपना स्थान न खोवे वाला चिरजीवी हवे आ मरें के बाद भी जियेवाला सच्ची आयुवान हवे।
यह मुझसे कैसे संबंधित है?
हम सब दूसरन के बारे में बहुत जानत हविं बाकी आपन के बारे में कम। मेरे भीतर के शक्ति जाने बिना मैं बाहर के चुनौती नइखे जीत सकत। संतोष आ आत्म-ज्ञान हमरा जीव के सच्ची दिशा दे सकत हवे।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज मैं कुछ देर शांत बइठ के आपन भीतर के देखूं। पूछूं कि मैं अपना भीतर के शक्ति के कहाँ इस्तेमाल करत बानी हूं। संतोष के भाव से कवनो छोट काम मेहनत से करूं।
संबंधित अध्याय
मेरा चिंतन
What does this chapter inspire in you? How will you apply it?