Chapter 76

मनुष्य जीव म softतो हूँ

人之生也柔弱,其死也坚强。万物草木之生也柔脆,其死也枯槁。
故坚强者死之徒,柔弱者生之徒。
是以兵强则灭,木强则折。强大处下,柔弱处上。
जब मनुष्य जन्म ले है, तsह softतो हूँ,
मरै है, तsह कड़ो हूँ।
जड़-बूटी-पत्ता जब जीये है, तsह नरम-मुलायम हूँ,
मरै है, तsह सूखो-कंडो हूँ।
तsह कड़ा हूँ वो मरवा के रास्ते म,
softतो वो जीवन के रास्ते म।
सेना जब ताकतवर होय है, तsह नाश होवे है,
लकड़ी जब कड़ी होय है, तsह टूट जावे है।
ताकतवर तो नीचे रहे है,
softतो ऊपर रहे है।

गहरो विचार

इ अध्याय किण बारे में है?

ही म्हारो-तुम्हारो जीव आळू-कोमळौ, नाज़ुक हूँ। जब हूँ जिये है, तळ हूँ softतो-मुलायम, जब मरिये है, तळ हूँ कड़ो-सख्त। जड़-बूटी-पत्ता जैसो सब कुछ जीये है, तsह कोमळ हूँ, मरै है, तsह सूखो-कंडो हूँ। कड़ापन मरण तरफ ले जावे है, softता जीवन तरफ।

इ म्हारे सूं केड़ो संबंधित है?

ही म्हारो जीव म softता-कड़ाई का खेल हूँ। सदा कड़ौ न होवै का प्रयास करतो हूँ, पण जब कमजोर हूँ, तsह घबरातो हूँ। यs याद राखणो चाहियो के softता म हि सच्ची ताकत हूँ।

आज म्हैं के करणो चाहीजे?

आज जब कठिनाई आवे, तsह कड़ाई न करो, स softतई से समस्या का सामना करो। घुटनू न करो, नम्र राखो।

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म्हारो विचार

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