Chapter 70

म्हारी वाणी सादी है

吾言甚易知,甚易行。天下莫能知,莫能行。
言有宗,事有君。夫唯无知,是以不我知。
知我者希,则我者贵。是以圣人被褐怀玉。
म्हारी वाणी तो बणी साधी है, बणी सीधी है।
पण जग में कोई एकरो नइयां समज़्या, कोई एकरो नइयां चाल्या।
वाणी रै मूल होय है, काम रै राजा होय है।
जेठै नइयां जान्या, एठै म्हारो नइयां पार्या।
म्हारो जानण वालो थोड़ा है, म्हारो मानण वालो अरबड़ा है।
एठै साधु रै पैल्या में कंगना है, भीतर मणी है।

गहरो विचार

इ अध्याय किण बारे में है?

ई अध्याय बतावय है कि सत्य सादा है, म्हारी सीख बणी सरल है। पण लोग इसे बणी कठिन मान्या है, कैमेंकि सचाई री तह सीधी होय है। जेठै जीव नइयां जान्या, एठै सत्य रै मार्ग नइयां पार्या। गुरु दीनो-चोर कपड़ा पहिर्या होय है, भीतर रत्न छुपाया होय है।

इ म्हारे सूं केड़ो संबंधित है?

म्हारी जिंदगी में भी बणे बात है - सच सादा होय है, पण म्हारो अभिमान म्हानै कहियाण है। मैं बणी सोच-विचार करिया, पण आसान सत्य नइयां देख्या। जेठै लोग म्हानै नइयां समज़्या, एठै म्हारै में दोष नइयां।

आज म्हैं के करणो चाहीजे?

आज मैं कोई साधारण सी बात मान्या, जेकरो मैं हमेशा टाल्या है। कोई सीधी सी सलाह मान्या, बिना गहराई में जाया।

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म्हारो विचार

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