Chapter 49
संतारां ने कोई थिर मन ने रेखत
Original
善者,吾善之;不善者,吾亦善之,德善。
信者,吾信之;不信者,吾亦信之,德信。
圣人在天下,歙歙为天下浑其心。百姓皆注其耳目,圣人皆孩之。
अनुवाद
गहरो विचार
इ अध्याय किण बारे में है?
हां चेप्टर बणातो हुंदा हां री महानता री जाती, जे हां में कोई थिर निजी राय ने हुंदी। संत आपणो मन बदल रेखत हां, जणारां रे मन रे अनुसार। जे भलो हां तो जांयणो भलो मान रेखत हां, आर जे भलो ने हां तो जांयणो भलो मान रेखत हां - हां में री सच्ची दया हुंदी। हां में कोई भेदभाव ने हुंदो, ना छोटो-बडो़।
इ म्हारे सूं केड़ो संबंधित है?
मैं री जिंदगी में हां री बात बणी आय रे हां - मैं प्रायः आपणार निजी राय से काम करूं। पर चेप्टर मुझे सिखावे हां रे हां, जे मैं दूज़णां रे मन री बात सुणूं। जे कोई मुझसे अलग हां तो जांयणो मुझे बुरो ने मानूं, तो मैं क्रोध ने करूं - हां बजाय हां री जगह हांयणां ने सिखणो चाहियो।
आज म्हैं के करणो चाहीजे?
आज मैं कोई एगो ऐसो व्यक्ति ढूंढूं जिणो री मैं समझ ने करूं आर हांसो बणूं, आर जांयणो ने बुरो मानणे रे बजाय हांयणो ने मुठे भाव से सुणूं।
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म्हारो विचार
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