जतय शासन निपूर्ण अछि, उतय प्रजा सम्पूर्ण अछि। जतय शासन कठोर अछि, उतय प्रजा दरिद्र अछि। आनन्द सँ दुःख अछि, दुःख सँ आनन्द अछि। एहि दुनुक अन्त कें कोन जानैत अछि? ई सदा एकहिसँ दोसरमे बदलैत रहैत अछि। भलाई बुराइमे आओर बुराई भलाइमे बदलैत रहैत अछि। मनुख्यक मोह अबितो बहुत पुरान अछि। एहि कारण संत लोक सीधा अछि मुदा काटय नहि जाइत, शुद्ध अछि मुदा घाय नहि लगावयत, खरा अछि मुदा उद्धत नहि अछि, चमकैत अछि मुदा दीपिक नहि जरावयत।
गहन चिंतन
ई अध्याय की बारे में बा?
ई अध्याय कहैत अछि जे शासनक तरीका कें प्रजाक स्वभाव बदलि दैत अछि। जखन शासन कोमल अछि, तखन प्रजा समृद्ध अछि; जखन कठोर अछि, तखन प्रजा दरिद्र अछि। दुःख आनन्द एकहिसँ दोसरमे जुड़ल अछि - दुःखमे आनन्द लुकल अछि आ आनन्दमे दुःख। ई कें कोन समझैत अछि जे ई स्थिति निरन्तर बदलैत रहैत अछि? संत लोक नैतिक अछि मुदा क्रूर नहि, शुद्ध अछि मुदा आघात नहि करयत, सीधा अछि मुदा अशिष्ट नहि।
एहि कें हमरा सँ की संबंध?
मेरा जीवनमे हम देखैत छी जे जखन हम नियम कें सख्त बनावैत छी, तखन परिवारमे तनाव बढ़ि जाइत अछि। परम्पराक विरुद्ध भोग अछि - कोनो काज सफल होबय मे कठिनाई अछि मुदा ओही कठिनाई सँ हम सीखैत छी। शान्त रहबय मे गुप्त शक्ति अछि।
आइ हम की करी?
आजुक दिनमे हम कोनो एक कार्य नीक नीयत सँ करब, बिनु दोसरक भलाइ बिगाड़य। कोनो स्थितिमे निर्णय लैत समय कोमल रहब आ अहंकार नहि करब।
The government that seems the most unwise, Oft goodness to the people best supplies; That which is meddling, touching everything, Will work but ill, and disappointment bring. Misery! happiness is to be found by its side! Happiness! misery lurks beneath it! Therefore the sage is (like) a square which cuts no one (with its angles); (like) a corner which injures no one (with its sharpness). He is straightforward, but allows himself no license; he is bright, but does not dazzle.
AI आधुनिक
जतय शासन निपूर्ण अछि, उतय प्रजा सम्पूर्ण अछि। जतय शासन कठोर अछि, उतय प्रजा दरिद्र अछि। आनन्द सँ दुःख अछि, दुःख सँ आनन्द अछि। एहि दुनुक अन्त कें कोन जानैत अछि? ई सदा एकहिसँ दोसरमे बदलैत रहैत अछि। भलाई बुराइमे आओर बुराई भलाइमे बदलैत रहैत अछि। मनुख्यक मोह अबितो बहुत पुरान अछि। एहि कारण संत लोक सीधा अछि मुदा काटय नहि जाइत, शुद्ध अछि मुदा घाय नहि लगावयत, खरा अछि मुदा उद्धत नहि अछि, चमकैत अछि मुदा दीपिक नहि जरावयत।
मम विचार
एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?