Chapter 52
जगतकँ एकटा उत्पत्ति अछि
मूल
塞其兑,闭其门,终身不勤。开其兑,济其事,终身不救。
见小曰明,守柔曰强。用其光,复归其明,无遗身殃,是为习常。
अनुवाद
गहन चिंतन
ई अध्याय की बारे में बा?
एहि अध्यायमे कहल गेल अछि जे संसारक एकटा मूल उत्पत्ति अछि, जे सबटा काजकँ जन्म दै छनि। जे मूल कँ जानै छनि ओ जे ओकरँ सँ उत्पन्न भेल अछि ताहुदे जानै छनि। मूल कँ जानबए इहाँ पुत्र कँ जानबए आ जादा गहन ज्ञान हाबै छनि।
एहि कें हमरा सँ की संबंध?
हम सब निरन्तर नव-नव कार्यमे लागल रहै छियनै, मूल कँ भूल जादै छियनै। मैथिली संस्कृतिकँ रीतिरिवाज, हमर परिवारकँ मूल्य, हमर आत्मज्ञान — एहि सब कँ सम्झबए इहाँ हमर जीवनकँ स्थिरता दै छनि। जँ हम मातृभूमि आ मूल संस्कृतिकँ जानै छियन तँ हम पुत्र-पौत्र धरि शांति कँ पाबै छियनै।
आइ हम की करी?
आजु एकटा कार्य करू — अपन परिवारकँ कोनो पुरान गाथा, कोनो कहानी, कोनो व्यक्तिगत अनुभव लिखू वा रेकार्ड करू। अपन मूल कँ जानबए इहाँ जड़ता कँ विकास होयतै छनि।
संबंधित अध्याय
मम विचार
एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?