एहि अध्यायमे कहल गेल अछि जे संसारक एकटा मूल उत्पत्ति अछि, जे सबटा काजकँ जन्म दै छनि। जे मूल कँ जानै छनि ओ जे ओकरँ सँ उत्पन्न भेल अछि ताहुदे जानै छनि। मूल कँ जानबए इहाँ पुत्र कँ जानबए आ जादा गहन ज्ञान हाबै छनि।
Key Concepts
始
母
守母
见小
守柔
Cite This Chapter
Laozi, Tao Te Ching, Chapter 52, "जगतकँ एकटा उत्पत्ति अछि", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/mai/chapters/52/
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संसारक एकटा उत्पत्ति अछि, जे मानि लेल ताहि संसारक माता अछि। जँ माताकँ जानि लेल तहिना पुत्रकँ जानि सकै छी। जँ पुत्रकँ जानि लेल तहिना पुनः माताकँ सुरक्षित राखू, तँ जीवनभरि कखनो खतरा नै होयत। अपन रन्ध्र बंद करू, अपन द्वार बंद करू, तँ जीवनभरि कष्ट नै होयत। अपन रन्ध्र खोलू, अपन कार्य पूरा करू, तँ जीवनभरि कँहू नै बचा सकै छी। नन्हें कँ देखबए इहाँ ज्ञान अछि, कोमल कँ थामबए इहाँ बल अछि। तेहन प्रकाशकँ प्रयोग करू, फेर अपन ज्ञानमें लौटू, एहिसँ कखनो दुर्घटना नै होयत, एहि इहाँ शाश्वत धर्मकँ अनुसरण अछि।
गहन चिंतन
ई अध्याय की बारे में बा?
एहि अध्यायमे कहल गेल अछि जे संसारक एकटा मूल उत्पत्ति अछि, जे सबटा काजकँ जन्म दै छनि। जे मूल कँ जानै छनि ओ जे ओकरँ सँ उत्पन्न भेल अछि ताहुदे जानै छनि। मूल कँ जानबए इहाँ पुत्र कँ जानबए आ जादा गहन ज्ञान हाबै छनि।
एहि कें हमरा सँ की संबंध?
हम सब निरन्तर नव-नव कार्यमे लागल रहै छियनै, मूल कँ भूल जादै छियनै। मैथिली संस्कृतिकँ रीतिरिवाज, हमर परिवारकँ मूल्य, हमर आत्मज्ञान — एहि सब कँ सम्झबए इहाँ हमर जीवनकँ स्थिरता दै छनि। जँ हम मातृभूमि आ मूल संस्कृतिकँ जानै छियन तँ हम पुत्र-पौत्र धरि शांति कँ पाबै छियनै।
आइ हम की करी?
आजु एकटा कार्य करू — अपन परिवारकँ कोनो पुरान गाथा, कोनो कहानी, कोनो व्यक्तिगत अनुभव लिखू वा रेकार्ड करू। अपन मूल कँ जानबए इहाँ जड़ता कँ विकास होयतै छनि।
(The Tao) which originated all under the sky is to be considered as the mother of them all. When the mother is found, we know what her children should be. The perception of what is small is (the secret of) clear-sightedness; the guarding of what is soft and tender is (the secret of) strength.
AI आधुनिक
संसारक एकटा उत्पत्ति अछि, जे मानि लेल ताहि संसारक माता अछि। जँ माताकँ जानि लेल तहिना पुत्रकँ जानि सकै छी। जँ पुत्रकँ जानि लेल तहिना पुनः माताकँ सुरक्षित राखू, तँ जीवनभरि कखनो खतरा नै होयत। अपन रन्ध्र बंद करू, अपन द्वार बंद करू, तँ जीवनभरि कष्ट नै होयत। अपन रन्ध्र खोलू, अपन कार्य पूरा करू, तँ जीवनभरि कँहू नै बचा सकै छी। नन्हें कँ देखबए इहाँ ज्ञान अछि, कोमल कँ थामबए इहाँ बल अछि। तेहन प्रकाशकँ प्रयोग करू, फेर अपन ज्ञानमें लौटू, एहिसँ कखनो दुर्घटना नै होयत, एहि इहाँ शाश्वत धर्मकँ अनुसरण अछि।
मम विचार
एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?