ई अध्याय कहैत अछि जे आकाश आओर पृथिवी सब प्राणी कें एक समान देखैत अछि, न कोनो विशेष आदर न कोनो उपेक्षा। ओकरा एक बरतन सदृश समझू जे खाली होएत तोहि कें अधिकतम प्राप्ति होइत अछि। बेसी बोलने सँ केवल हानि होइत अछि।
Key Concepts
天地
无为
守中
不仁
Cite This Chapter
Laozi, Tao Te Ching, Chapter 5, "आकाश आओर पृथिवी कोनो पक्ष नहि लेत", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/mai/chapters/5/
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आकाश आओर पृथिवी कोनो पक्ष नहि लेत, सब प्राणी कें एक समान देखैत अछि; धर्मी मनुख कोनो पक्ष नहि लेत, सब लोक कें एक समान देखैत अछि। आकाश आओर पृथिवीक बीचमे, ओकरा काठक बरतन सदृश मानू जे खाली अछि किनु कभु खाली नहि होइत अछि। जखन ओकरा फूकल जाइत अछि तखन आओर अधिक बाहर आबैत अछि। बेसी बोलने सँ शक्ति कम होइत अछि, एकरा बजाय भीतरक शांति कें पकड़ू।
गहन चिंतन
ई अध्याय की बारे में बा?
ई अध्याय कहैत अछि जे आकाश आओर पृथिवी सब प्राणी कें एक समान देखैत अछि, न कोनो विशेष आदर न कोनो उपेक्षा। ओकरा एक बरतन सदृश समझू जे खाली होएत तोहि कें अधिकतम प्राप्ति होइत अछि। बेसी बोलने सँ केवल हानि होइत अछि।
एहि कें हमरा सँ की संबंध?
हम सब समय बताबय कें कोशिश करैत अछि जे असलमे बेसी बोलने सँ हम कमजोर होइत अछि। ई अध्याय हम कें सिखाइत अछि जे चुप रहि कें भीतरक शांति कें सुनू — ओकरा बाहर आबय दिआू।
आइ हम की करी?
आज एकटा पूरा दिन चुप रहय कें कोशिश करू। बेसी बोलने कें बजाय सुनू, आओर भीतरक शांति कें स्थापित करू। बाहर निकलबय सँ पहिने भीतर सँ प्रवाहित होमए देउ।
Heaven and earth do not act from (the impulse of) any wish to be benevolent; they deal with all things as the straw dogs are dealt with. The sages do not act from (any wish to be) benevolent; they deal with the people as the straw dogs are dealt with. May not the space between heaven and earth be compared to a bellows? It is emptied, yet it loses not its power; it is moved again, and sends forth air the more.
AI आधुनिक
आकाश आओर पृथिवी कोनो पक्ष नहि लेत, सब प्राणी कें एक समान देखैत अछि; धर्मी मनुख कोनो पक्ष नहि लेत, सब लोक कें एक समान देखैत अछि। आकाश आओर पृथिवीक बीचमे, ओकरा काठक बरतन सदृश मानू जे खाली अछि किनु कभु खाली नहि होइत अछि। जखन ओकरा फूकल जाइत अछि तखन आओर अधिक बाहर आबैत अछि। बेसी बोलने सँ शक्ति कम होइत अछि, एकरा बजाय भीतरक शांति कें पकड़ू।
मम विचार
एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?