चेतना (छवि) आरू शरीरक एकता धारण करब, की एहन सकल अछि बिनु विच्छेद? श्वासक शुद्ध करि कोमलता पावब, की शिशुसभक इव होयत सकल अछि? गहन दर्पणक शुद्ध करब, की दोषरहित राखि सकल अछि? प्रजाक प्रेम आरू राष्ट्रक शासन करब, की निःक्रिय राखि सकल अछि? स्वर्गक द्वार खुलब-बंद होब, की मूकतासभक इव शांत राखि सकल अछि? सब विषय समझब, की अज्ञानसभक इव विनम्र राखि सकल अछि? जीवन दैब आरू पालन करब, जनैब किन्तु अधिकार नहि करब, काज करब किन्तु आशा नहि राखब, नेतृत्व करब किन्तु नियंत्रण नहि करब — एहि उपाधि अछि गहन धर्म।
गहन चिंतन
ई अध्याय की बारे में बा?
एहि अध्यायमे कहल गेल अछि जे आत्मा आरू शरीरक एकता स्थापित करब सर्वाधिक महत्वपूर्ण अछि। शिशुक इव कोमल चेतना राखब, आँखियार दोषरहित शुद्ध दर्पण राखब, आरू प्रजापालनमे निःक्रिय आरू विनम्र रहब — ई साधक लेल आवश्यक अछि। जे दाता अछि ओ सर्वस्व दैत अछि किन्तु अधिकार नहि मांगत, ई गहन धर्म अछि।
एहि कें हमरा सँ की संबंध?
हम अपन दैनिक जीवनमे बहुत ध्यान भटकाबैत छी। मोबाइल, सोशल मीडिया, समाचार — सब हमर आत्मासभ कय रहल अछि। ई अध्याय हमरा याद करावैत अछि जे भीतरक शांति आरू एकता महत्वपूर्ण अछि, बाहरी विचलनसभ नहि। हम अपन विचार, भावना आरू शरीरक एकमे राखय चाहैत छी।
आइ हम की करी?
आजु सुनुटो चुपचाप बैसि, आँखियार बंद करि, आरू अपन सांसक गिनती करब। मात्र दस मिनट एहि साधनासभ कयब — ई आत्मा आरू शरीरक एकता स्थापित करबाक सरल उपाय अछि।
When the intelligent and animal souls are held together in one embrace, they can be kept from separating. When one gives undivided attention to the (vital) breath, and brings it to the utmost degree of pliancy, he can become as a (tender) babe. (The Tao) produces (all things) and nourishes them; it produces them and does not claim them as its own; it does all, and yet does not boast of it; it presides over all, and yet does not control them.
AI आधुनिक
चेतना (छवि) आरू शरीरक एकता धारण करब, की एहन सकल अछि बिनु विच्छेद? श्वासक शुद्ध करि कोमलता पावब, की शिशुसभक इव होयत सकल अछि? गहन दर्पणक शुद्ध करब, की दोषरहित राखि सकल अछि? प्रजाक प्रेम आरू राष्ट्रक शासन करब, की निःक्रिय राखि सकल अछि? स्वर्गक द्वार खुलब-बंद होब, की मूकतासभक इव शांत राखि सकल अछि? सब विषय समझब, की अज्ञानसभक इव विनम्र राखि सकल अछि? जीवन दैब आरू पालन करब, जनैब किन्तु अधिकार नहि करब, काज करब किन्तु आशा नहि राखब, नेतृत्व करब किन्तु नियंत्रण नहि करब — एहि उपाधि अछि गहन धर्म।
मम विचार
एहि अध्याय अहाँ केँ की प्रेरित करैत अछि? अहाँ एकरा कीदे लागू करब?