अध्याय 52
संसार का आदि स्रोत
मूल
塞其兑,闭其门,终身不勤。开其兑,济其事,终身不救。
见小曰明,守柔曰强。用其光,复归其明,无遗身殃,是为习常。
अनुवाद
अपने इंद्रिय-द्वार बंद करो, अपने मन के दरवाजे बंद करो, तो जीवन भर परिश्रम नहीं करना पड़ेगा। इंद्रिय-द्वार खोलो, अपने कामों में लग जाओ, तो जीवन भर मुक्ति नहीं मिलेगी।
छोटे को देखना ही स्पष्टता है, कोमलता को पकड़ना ही शक्ति है। अपनी रोशनी का उपयोग करो, अपनी स्पष्टता में लौट जाओ, और अपने शरीर पर संकट न आने दो—यही शाश्वतता का अभ्यास है।
गहन चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
यह अध्याय बताता है कि संसार का एक मूल स्रोत है, जिसे 'माता' कहा गया है। इस मूल को जानकर ही हम उसके प्रभावों (पुत्र) को समझ सकते हैं। इंद्रियों और इच्छाओं पर नियंत्रण करके हम परिश्रम से बच सकते हैं, और छोटी-छोटी बातों में स्पष्टता तथा कोमलता में शक्ति पाकर शाश्वत मार्ग पर चल सकते हैं।
इसका मुझसे क्या संबंध है?
मेरे जीवन में यह मुझे याद दिलाता है कि मैं अक्सर बाहरी चीज़ों में उलझ जाता हूँ और अपने भीतर के स्रोत को भूल जाता हूँ। जब मैं अपनी इंद्रियों को शांत करता हूँ और सादगी को अपनाता हूँ, तो मुझे शांति और स्पष्टता मिलती है।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज, दिन में कुछ मिनट अपनी इंद्रियों को बंद करने का अभ्यास करें—आँखें बंद करें, चुप बैठें, और अपनी सांस पर ध्यान दें। इससे आप अपने भीतर के स्रोत से जुड़ सकते हैं।
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