अध्याय 49

संत का हृदय

Quick Answer

यह अध्याय कहता है कि सच्चा संत सभी प्राणियों के प्रति समान प्रेम और करुणा रखता है, बिना भेदभाव के। वह अच्छे और बुरे, विश्वासी और अविश्वासी सभी को समान रूप से स्वीकार करता है और उन्हें अपने बच्चों की तरह पालता है।

Key Concepts

  • 无常心
  • 百姓心
  • 德善
  • 德信

Cite This Chapter

Laozi, Tao Te Ching, Chapter 49, "संत का हृदय", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/hi/chapters/49/

Classical Chinese, translation, and AI reflection are shown separately; cite this chapter URL for references.

圣人无常心,以百姓心为心。
善者,吾善之;不善者,吾亦善之,德善。
信者,吾信之;不信者,吾亦信之,德信。
圣人在天下,歙歙为天下浑其心。百姓皆注其耳目,圣人皆孩之。
संत का कोई स्थायी हृदय नहीं होता; वह लोगों के हृदय को अपना हृदय बना लेता है। जो अच्छे हैं, मैं उनके प्रति अच्छा हूँ; जो अच्छे नहीं हैं, मैं भी उनके प्रति अच्छा हूँ। यही सच्ची अच्छाई है। जो विश्वास करते हैं, मैं उन पर विश्वास करता हूँ; जो विश्वास नहीं करते, मैं भी उन पर विश्वास करता हूँ। यही सच्चा विश्वास है। संत संसार में रहते हुए, सबके लिए अपने हृदय को एक कर लेते हैं। लोग अपनी आँखें और कान उन पर लगाते हैं, और संत उन सबको अपने बच्चों के समान मानते हैं।

गहन चिंतन

यह अध्याय किस बारे में है?

यह अध्याय कहता है कि सच्चा संत सभी प्राणियों के प्रति समान प्रेम और करुणा रखता है, बिना भेदभाव के। वह अच्छे और बुरे, विश्वासी और अविश्वासी सभी को समान रूप से स्वीकार करता है और उन्हें अपने बच्चों की तरह पालता है।

इसका मुझसे क्या संबंध है?

मेरे जीवन में, यह मुझे सिखाता है कि मैं दूसरों को उनके गुणों या दोषों के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी मूल मानवता के कारण स्वीकार करूँ। यह मेरे अंदर निर्णय और पक्षपात की भावना को कम करने में मदद करता है।

आज मुझे क्या करना चाहिए?

आज, जब मैं किसी ऐसे व्यक्ति से मिलूँ जो मुझसे असहमत हो या जिसे मैं पसंद नहीं करता, तो मैं उनके प्रति दयालुता और समझदारी से पेश आने का प्रयास करूँगा, जैसे कि वे मेरे अपने हों।

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