सच्चा गुण गुण का दिखावा नहीं करता, इसलिए वह गुण है। नीच गुण गुण को नहीं खोने देता, इसलिए वह गुणहीन है। सच्चा गुण बिना कार्य के काम करता है, और कोई उद्देश्य नहीं रखता। नीच गुण कार्य करता है और उद्देश्य रखता है। सच्ची करुणा बिना उद्देश्य के काम करती है। सच्चा न्याय उद्देश्य से काम करता है। सच्चा शिष्टाचार काम करता है, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर बाँहें उठाकर बल प्रयोग करता है। इसलिए, जब ताओ खो जाता है, तो गुण आता है; जब गुण खो जाता है, तो करुणा आती है; जब करुणा खो जाती है, तो न्याय आता है; जब न्याय खो जाता है, तो शिष्टाचार आता है। शिष्टाचार निष्ठा और विश्वास का अभाव है, और अराजकता की शुरुआत है। पूर्वज्ञान ताओ का दिखावा है, और मूर्खता की शुरुआत है। इसलिए सच्चा व्यक्ति गहराई में रहता है, सतह पर नहीं; सार में रहता है, दिखावे में नहीं। वह उसे छोड़ता है और इसको लेता है।
गहन चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
यह अध्याय सच्चे और झूठे गुण में अंतर करता है। सच्चा गुण बिना दिखावे के होता है, जबकि झूठा गुण नियमों और अनुष्ठानों पर निर्भर होता है।
इसका मुझसे क्या संबंध है?
मैं अक्सर अपने कार्यों में दिखावे और मान्यता की चिंता करता हूँ। यह मुझे याद दिलाता है कि सच्चा गुण बिना किसी अपेक्षा के किया गया कार्य है।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज, एक अच्छा काम करें बिना किसी से बताए या उसकी प्रशंसा की उम्मीद किए।
(Those who) possessed in highest degree the attributes (of the Tao) did not (seek) to cultivate them, and thus they were possessed of them (in the highest degree). Thus it was that when the Tao was lost, its attributes appeared; when its attributes were lost, benevolence appeared; when benevolence was lost, righteousness appeared; and when righteousness was lost, the proprieties appeared.
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सच्चा गुण गुण का दिखावा नहीं करता, इसलिए वह गुण है। नीच गुण गुण को नहीं खोने देता, इसलिए वह गुणहीन है। सच्चा गुण बिना कार्य के काम करता है, और कोई उद्देश्य नहीं रखता। नीच गुण कार्य करता है और उद्देश्य रखता है। सच्ची करुणा बिना उद्देश्य के काम करती है। सच्चा न्याय उद्देश्य से काम करता है। सच्चा शिष्टाचार काम करता है, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर बाँहें उठाकर बल प्रयोग करता है। इसलिए, जब ताओ खो जाता है, तो गुण आता है; जब गुण खो जाता है, तो करुणा आती है; जब करुणा खो जाती है, तो न्याय आता है; जब न्याय खो जाता है, तो शिष्टाचार आता है। शिष्टाचार निष्ठा और विश्वास का अभाव है, और अराजकता की शुरुआत है। पूर्वज्ञान ताओ का दिखावा है, और मूर्खता की शुरुआत है। इसलिए सच्चा व्यक्ति गहराई में रहता है, सतह पर नहीं; सार में रहता है, दिखावे में नहीं। वह उसे छोड़ता है और इसको लेता है।
मेरा चिंतन
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