अध्याय 72
जब लोग भय ना करें त बड़का दंड आवेला
मूल
无狎其所居,无厌其所生。夫唯不厌,是以不厌。
是以圣人自知不自见,自爱不自贵。故去彼取此。
अनुवाद
अपना घर में ओकरा के ना घुसाई, अपना जिय में ओकरा के ना दबाई।
जे बेरि कवनो ना दबावल जाला, ओकरा के ना दबावल जाला।
एह से संत ज्ञानी अपना के जानत बा लेकिन अपना के ना दिहाला, अपना के भगवान जानत बा लेकिन अपना के बड़का ना मानत बा। एह से ओकरा के छोड़ के एकरा के लीं।
गहन चिंतन
एहि अध्याय में का बात होला?
ई अध्याय कहेला कि जब लोग कवनो डर ना करें, तब बड़का दंड आ जाला। ईश्वर के बड़का दंड होला जब लोग अपना जीवन में नियम के पालन ना करें। जब लोग अपना जगह से बेसी दबाव में ना होई, तब ओ अपना जगह पर रहत बा। संत ज्ञानी अपना के जानत बा पर अपना के दुनिया में ना दिखावत बा, अपना के चाहत बा पर अपना के बड़का ना मानत बा।
एहि के मोहल्ला से का संबंध?
जब हम दुनिया के डर से जियत बानी, तब हम अपना असली स्वभाव से दूर हो जात बानी। पता ना चले कि जब हम अपना के ईश्वर के नजर में देखत बानी, तब हम अपना के बड़का ना माने वाला बात के समझ पावत बानी।
आज का करब?
आज के दिन हम अपना जीवन में दबाव के रास्ता छोड़ू, चाहे ओ अपना परिवार के होई कि दुनिया के। अपना के ईश्वर के सामने ठीकठाक रखू, पर अपना के दुनिया के सामने ना दिखावू।
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मोहना विचार
एहि अध्याय में रउआ के का प्रेरित करेला? रउआ एकरा केसे लागू करब?