ई अध्याय कहेला कि दुनिया के शुरुआत बाटे जेकरा के माई मानल जाला। जब रउआ माई के जान लेब त बच्चा के भी जान जाब। बंद नाक-मुँह रखला से दुख कम हो जाला, खोलला से बढ़ जाला। छोट बात के देखला बड़का बुझदरी हवे, नरम रहला से ताकत मिले हवे।
Key Concepts
始
母
守母
见小
守柔
Cite This Chapter
Laozi, Tao Te Ching, Chapter 52, "जगत के शुरुआत", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/awa/chapters/52/
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जगत के शुरुआत होला, जेकरा के जगत के माई मानल जाला। जब माई के पता लाग जाला, त सभे बच्चा के भी जान लेला जाला। जब बच्चा के जान लेला जाला, त फेर माई के संभाले ला, एहिसे से कबो मरत नइखे। नाक-मुँह के बंद कर दा, दरवाजा लगा दे, त सात जन्म के टेंशन नइखे। नाक-मुँह खोल के दुनिया के काम में पड़ जा, त सात जन्म के मुक्ति नइखे मिले। छोट के देखला के नाम बुझदरी हवे, नरम के संभालला के नाम शक्ति हवे। जेहर रोशनी हवे ओकरा के उजाला में ले जा, फेर बुझदरी में वापस आ जा, एहिसे से कबो गम नइखे, इहे शाश्वत का रास्ता हवे।
गहरा चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
ई अध्याय कहेला कि दुनिया के शुरुआत बाटे जेकरा के माई मानल जाला। जब रउआ माई के जान लेब त बच्चा के भी जान जाब। बंद नाक-मुँह रखला से दुख कम हो जाला, खोलला से बढ़ जाला। छोट बात के देखला बड़का बुझदरी हवे, नरम रहला से ताकत मिले हवे।
यह मुझसे कैसे संबंधित है?
हमरा ले कवना बात महत्व के हवे कि दुनिया के शुरुआत के जाने से हमरा में बड़का सूझ आ जाला। हर काम में पहिले मूल कारण के देखे के कोशिश करे के चाही। जब मन शांत रहेला, त सच्ची बुझदरी मिले हवे।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज मन लगा के कवनो बात के गहिराई में जा। जेहर काम करे के मन करे, ओकरा के मूल कारण के सोच। दिन में कम से कम दू बार साँस के गिनला से मन के शांत करे।
(The Tao) which originated all under the sky is to be considered as the mother of them all. When the mother is found, we know what her children should be. The perception of what is small is (the secret of) clear-sightedness; the guarding of what is soft and tender is (the secret of) strength.
AI Modern
जगत के शुरुआत होला, जेकरा के जगत के माई मानल जाला। जब माई के पता लाग जाला, त सभे बच्चा के भी जान लेला जाला। जब बच्चा के जान लेला जाला, त फेर माई के संभाले ला, एहिसे से कबो मरत नइखे। नाक-मुँह के बंद कर दा, दरवाजा लगा दे, त सात जन्म के टेंशन नइखे। नाक-मुँह खोल के दुनिया के काम में पड़ जा, त सात जन्म के मुक्ति नइखे मिले। छोट के देखला के नाम बुझदरी हवे, नरम के संभालला के नाम शक्ति हवे। जेहर रोशनी हवे ओकरा के उजाला में ले जा, फेर बुझदरी में वापस आ जा, एहिसे से कबो गम नइखे, इहे शाश्वत का रास्ता हवे।
मेरा चिंतन
What does this chapter inspire in you? How will you apply it?