सबसे बड़हन नेता ओकरा बा जेकरा के लोग केवल अस्तित्व के पता बा; ओकरा से ना प्रेम बा, ना भय, ना काहू के इज्जत। ओकरा के बाद ओ नेता बा जेकरा के लोग चाहत बा आरू प्रशंसा करत बा। फेर ओ नेता बा जेकरा के लोग डरत बा। आरू सबसे नीचा ओ नेता बा जेकरा के लोग तिरस्कार करत बा। जब नेता के भरोसा कम हो जाला, त लोग अविश्वासी हो जात बा। बड़हन नेता खाली अपने काम में लीन रहत बा आरू कम बोलत बा। जब काम सफल हो जाला आरू सब सुखी हो जात बा, त लोग कहत बा कि ई तs अपने आप हो गइल।
गहरा चिंतन
यह अध्याय किस बारे में है?
ई अध्याय बतावेला कि शासन के चार स्तर बा। सबसे बढ़िया ओ शासन बा जहाँ लोग जानत नाहीं कि शासक बा; दूसरा जहाँ लोग ओकरा के चाहत बा; तीसरा जहाँ लोग डरात बा; आरू चउथा जहाँ लोग तिरस्कार करत बा। सच्चा बड़हन नेता खाली काम करत बा आरू लोग कहत बा कि ई सब अपने आप भइल।
यह मुझसे कैसे संबंधित है?
मेरा जीवन में भी ई बात लागू होत बा - मई जब कम दिखात बानी जा आरू खाली अपना काम में लगल रहत बानी जा, त परिवार आरू दोस्त मोती ज्यादा सम्मान देत बा। जब मई बहुत दिखावा करत बानी जा, त लोग दूरी रखत बा।
आज मुझे क्या करना चाहिए?
आज अपना किसी भी काम में कम दिखावा करबो। खाली मन के कहबो - मई खाली अपना कर्तव्य निभावत बानी जा, बाकी सब काहू के ले छोड़ देत बानी जा। बिना प्रशंसा के इंतजार के काम करबो।
In the highest antiquity, (the people) did not know that there were (their rulers). In the next age they loved them and praised them. In the next they feared them; in the next they despised them. Their work was done and their undertakings were successful, while the people all said, 'We are as we are, of ourselves!'
AI Modern
सबसे बड़हन नेता ओकरा बा जेकरा के लोग केवल अस्तित्व के पता बा; ओकरा से ना प्रेम बा, ना भय, ना काहू के इज्जत। ओकरा के बाद ओ नेता बा जेकरा के लोग चाहत बा आरू प्रशंसा करत बा। फेर ओ नेता बा जेकरा के लोग डरत बा। आरू सबसे नीचा ओ नेता बा जेकरा के लोग तिरस्कार करत बा। जब नेता के भरोसा कम हो जाला, त लोग अविश्वासी हो जात बा। बड़हन नेता खाली अपने काम में लीन रहत बा आरू कम बोलत बा। जब काम सफल हो जाला आरू सब सुखी हो जात बा, त लोग कहत बा कि ई तs अपने आप हो गइल।
मेरा चिंतन
What does this chapter inspire in you? How will you apply it?