Chapter 52
जगत को एगो सुरुआत छे
Quick Answer
जगत की शुरुआत एगो माँ जेसी छे - जे कळा माँ नै जाणे, सो कळा बच्चा नै जाणे। जे बच्चा नै जाणे सो फिर माँ पै लौट आवे। जे माँ नै जाणे सो ज़िनगी-मरन नै नै डर।
Key Concepts
- 始
- 母
- 守母
- 见小
- 守柔
Cite This Chapter
Laozi, Tao Te Ching, Chapter 52, "जगत को एगो सुरुआत छे", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/mwr/chapters/52/
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Original
塞其兑,闭其门,终身不勤。开其兑,济其事,终身不救。
见小曰明,守柔曰强。用其光,复归其明,无遗身殃,是为习常。
अनुवाद
नाक-मुँह बंद करो, दरवाज़ा बंद करो, ता ज़िनगी भर तू परेशान नै होय। नाक-मुँह खोलो, काम-धंधा करो, ता ज़िनगी भर उज़ार नै पाय।
छोटकी चीज़ नै देखणा एगो दीपक छे, नरमी नै संभाळणा एगो ताक़त छे। बत्ती की रोशनी बटोलो, फिर दीपक नै लौटा लो - एहिसे आपण पै बदा नै आवे, एहि नै 'बरतन' कह्या जाय।
गहरो विचार
इ अध्याय किण बारे में है?
जगत की शुरुआत एगो माँ जेसी छे - जे कळा माँ नै जाणे, सो कळा बच्चा नै जाणे। जे बच्चा नै जाणे सो फिर माँ पै लौट आवे। जे माँ नै जाणे सो ज़िनगी-मरन नै नै डर।
इ म्हारे सूं केड़ो संबंधित है?
जे कळा आपण बच्चा नै जाणता हाँ, सो बच्चा नै पाछै माँ पै लौट आवे। मई आपण काम नै करता हाँ पर सो कहाँ सूं आया एकरा पै ध्यान नै दिया।
आज म्हैं के करणो चाहीजे?
आज थोड़ी देर ख़ामोश बैठो, आपण नाक-मुँह बंद करो, बाहर की आवाज़ नै सुनणे की कोशिश करो - एहिसे आपण भीतर वाला आवाज़ सुन सकोगे।
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म्हारो विचार
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