Chapter 46
जग मैं ताऊ हुवै त
Quick Answer
जैसले कहे थे कि जब ताऊ जग मैं राज करे, तब युद्ध के घोड़े खेत जोतमें लग जाणै, जब ताऊ नाही राज करे, तब घोड़े युद्धभूमि मैं बछड़ा जणै। सबसे बड़ौ दुख नाही जाण्या कि मिल्या हुवा काफी छे, और सबसे बड़ौ पाप नाही कि और मिलेगा चाहिए। जो संतोष जाणे, सो सदा सुखी रहे।
Key Concepts
- 知足
- 无道
- 有道
Cite This Chapter
Laozi, Tao Te Ching, Chapter 46, "जग मैं ताऊ हुवै त", laotzu.ai: https://www.laotzu.ai/mwr/chapters/46/
Classical Chinese, translation, and AI reflection are shown separately; cite this chapter URL for references.
Original
祸莫大于不知足,咎莫大于欲得。故知足之足,常足矣。
अनुवाद
सबसे बड़ौ दुख नाही जाण्या संतोष, सबसे बड़ौ गुनाह नाही मिलना मन की। एही कारण संतोष जाण्या वाला, सदा संतुष्ट रहे।
गहरो विचार
इ अध्याय किण बारे में है?
जैसले कहे थे कि जब ताऊ जग मैं राज करे, तब युद्ध के घोड़े खेत जोतमें लग जाणै, जब ताऊ नाही राज करे, तब घोड़े युद्धभूमि मैं बछड़ा जणै। सबसे बड़ौ दुख नाही जाण्या कि मिल्या हुवा काफी छे, और सबसे बड़ौ पाप नाही कि और मिलेगा चाहिए। जो संतोष जाणे, सो सदा सुखी रहे।
इ म्हारे सूं केड़ो संबंधित है?
हम सदा और मिलने को तरसै रहै, नाही तो और मिल गओ तो और चाहिए। यही मन की भूख हमनै दुख देवे। जै तरह से जाणी लें कि हवै सो भोग लिया, तै नई तरह की शांति मिले।
आज म्हैं के करणो चाहीजे?
आज जौण करी कि जे हवै सो तै लिया, और नाही तै नाही। मन की ए चाह कि और चाहिए, न्यारी करी ले।
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म्हारो विचार
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